‘एक आंख के पास है एक आंखों से दूर, बेटा हीरा होता है और बेटियां कोहिनूर’। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के अध्यक्ष और यश भारती सम्मान से सम्मानित डॉ. नवाज देवबंदी ने जब ये शेर पढ़ा तो एएमयू के वीमेंस कॉलेज में देर तक तालियां बजती रहीं। मौका था सोमवार को आयोजित किए गए वीमेंस कॉलेज में वार्षिक मुशायरा का। इसमें देश के कई शहरों से आए शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किये। वीमेंस कॉलेज की छात्राएं देर रात तक इसका लुफ्त उठाती रहीं।
डॉ. जावेद नसीमी ने बदलते जमाने में रिश्तों के मायने कैसे बदल रहे हैं, पर अपना शेर पढ़ते हुए कहा कि ‘दिलों के हैं जो ताल्लुक वही तो काम के हैं, कह अब ये खून के रिश्ते तो सिर्फ नाम के हैं ’। शायरा सलमा शाहीन ने कहा कि ‘ तेरे कूचे से निकलने का तरीका क्या है, पांव उठते नहीं गो पाओं में जंजीर नहीं’।
डॉ. सिराज अजमली, डॉ. विकार मानवी, डॉ. अजरा नक्वी, डॉ. महताब हैदर, राशिद अनवर, डॉ. जोया जैदी, मुईद रशीदी आदि ने अपने शेर पढ़कर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो चांसलर नवाब इब्ने सईद खान छतारी एवं कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शारिक अकील तथा धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. नईमा खातून ने किया। इस अवसर पर कुलपति की पत्नी सबीहा सीमा शाह, रजिस्ट्रार डॉ. असफर अली खान, प्रो. दुर्दानी कासिमी, हुमैरा अफरीदी, इमरान अली उस्मानी आदि भी मौजूद रहे।