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अलीगढ़ : 14 घंटे 49 मिनट का होगा सबसे लंबा रोजा

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इकराम वारिस
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इस बार रमजान का सबसे लंबा रोजा 14 घंटे 49 मिनट का होगा। चार अप्रैल को पहला रोजा होने की उम्मीद है। रमजान का चांद दिखते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी।
रमजान का चांद अगर दो अप्रैल को दिख गया तो पहला रोजा तीन अप्रैल को होगा। अगर दो अप्रैल को चांद नहीं दिखता है तो पहला रोजा चार अप्रैल को होगा। इस बार पहला रोजा 14 घंटे एक मिनट का होगा। इसके बाद रोजे का समय धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा। 29वां रोजा 14 घंटे 48 मिनट का जबकि 30वां रोजा 14 घंटे 49 मिनट का होगा।
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दो साल के बाद होगी नमाजियों की भीड़
कोरोना काल के बाद तकरीबन दो साल बाद मस्जिदों में नमाजियों की वैसे भीड़ होगी, जो कोराना काल से पहले होती थी। कोरोना काल में मस्जिदों में पांच-पांच लोगों को तरावीह और पांच वक्त की नमाज पढ़ने की इजाजत थी। इस बार कोविड प्रतिबंध खत्म होने की वजह से मस्जिदों में नमाजियों की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी।
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आमदनी का 2.5 फीसदी दें जकात : मुफ्ती डॉ. जाहिद
एएमयू के सुन्नी थियोलॉजी विभाग के मुफ्ती डॉ. जाहिद अली खान ने बताया कि इस्लाम में जकात का काफी महत्व है। यह इस्लाम का पांचवां स्तून (स्तंभ) भी है। हर साहिब-ए-निसाब (हैसियतमंद) को सालभर की आमदनी का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंद या गरीब को देना होता है। पूरे साल मुसलमान अपनी आमदनी का हिसाब-किताब करके जकात निकालता है। ईद से पहले इस जकात को निकाला जाता है, ताकि गरीब या जरूरतमंद लोग ईद की खुशी में शामिल हो सकें। ज्वेलरी का भी जकात निकाला जाता है। इसकी कीमत का 2.5 फीसदी रुपये जकात में देना होता है। उन्होंने कहा कि फितरा में एक किलो 661 ग्राम गेहूं होता है, जिसे गरीब और जरूरतमंद को देेना होता है। बेहतर हो कि इतना वजन का आटे की कीमत उसे दे दें।
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