सियासी समर में बागी न हों ये संभव नहीं है। जैसे-जैसे टिकट फाइनल होते जा रहे हैं बागी चेहरे सामने आते जा रहे हैं। कहीं कुछ अंदरखाने चल रहा है तो कहीं आमने-सामने की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। अभी तक सर्वाधिक बागियों की संख्या बरौली, इगलास व खैर सीट पर देखने को मिल रही है। हालांकि यह भविष्य के गर्त में है कि ये बागी किसे कितना नुकसान और किसे कितना लाभ पहुंचा पाएंगे? मगर इतना जरूर है कि बागियों के नाम सामने आने के बाद से दल और दावेदार बेचैन हैं। उन्हें मनाने-समझाने के प्रयास भी अंदरखाने चल रहे हैं।
भाजपा : बात भाजपा से शुरू करें तो सबसे पहले बरौली का नाम आता है। इस सीट पर पिछले दो बार से टिकट मांग रहे युवा नेता हेमवंत सिंह चौहान ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने स्वयं को बतौर स्वयं सेवक कार्य करते रहने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि वे बूथ से लेकर सेक्टर स्तर तक पर सक्रिय पदाधिकारी हैं। 2012 और 2017 में लगातार टिकट मांगा है। उस समय बाहर से आए दलवीर सिंह को और इस बार भी दूसरे दल से आए व्यक्ति को टिकट दे दिया गया। इससे आहत हूं। समर्थकों का प्यार है और निश्चित तौर पर चुनाव लड़ूंगा। अब दल चाहे कोई हो या निर्दल क्यों न लड़ना पड़े। इसी दल से जुड़े कोल से टिकट मांग रहे दीपक शर्मा अन्नू आजाद ने सोशल मीडिया पर उड़ रही खबरों का खंडन किया है। उन्होंने पार्टी के साथ रहने और पार्टी के साथ जीने-मरने की बात कही है। इसी सीट के राहुल सारस्वत ने भी पार्टी के साथ रहने की बात कही है।
रालोद : जिले में अच्छा वजूद रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल से इगलास में कई बागी खड़े हो रहे हैं। यहां टिकट के दावेदार सुमन दिवाकर, पूर्व विधायक त्रिलोकीराम दिवाकर, प्रीती धनगर ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम करने का एलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी को जीतने नहीं देंगे। चाहे कुछ भी करना पड़े। इधर, खैर में भी तेजेंद्र सिंह ने टिकट न मिलने पर दूसरे दलों की ओर रुख कर दिया है। अगर किसी अन्य दल से टिकट न मिला तो निर्दल भी दावा ठोक सकते हैं। बरौली में भाजपा छोड़ रालोद में गए राहुल शर्मा अभी खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उनका मोबाइल भी बंद है। मगर वे क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर विरोधाभासी पोस्ट कुछ इशारा कर रही हैं।
कांग्रेस : जिले में अभी तक चार सीटें घोषित हुई हैं और चार में से तीन पर पहले ही दिन से विरोध चल रहा है। इनमें शहर पर मनोज सक्सेना, सीपी गौतम, प्रीती शर्मा लगातार विरोध कर रहे हैं। बरौली पर विनोद पांडेय, ब्रजेश सिंह विरोध कर रहे हैं। सभी ने प्रत्याशी बदलने की मांग हाईकमान से की है। ब्रजेश सिंह का कहना है कि उन्हें उम्मीद है पार्टी अपना फैसला बदलेगी। नहीं तो अंत में कुछ सोचने को मजबूर होंगे। कोल पर आगा यूनुस पार्टी से त्यागपत्र देने की चेतावनी दे चुके हैं।
सपा : हालांकि रविवार शाम तक सिर्फ दो सीट शहर व अतरौली पर प्रत्याशी फाइनल हैं। कोल व छर्रा अभी तस्वीर साफ होने का इंतजार है। मगर झुकाव को देखते हुए इन दोनों पर विरोध के स्वर फूट रहे हैं। छर्रा से दावेदार आदित्य जुनूनी ने तो लखनऊ कार्यालय पर ही आत्मदाह का प्रयास किया है। शहर व कोल से जमीरउल्लाह समर्थक कई दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं।