जिला सहकारी बैंक के चुनाव में पर्चा खारिज किए जाने की साजिश के खिलाफ लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस मामले में पीड़ित सुरेंद्र शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में इंसाफ की गुहार लगाई है।
सुरेंद्र सिंह का आरोप है कि उनका पर्चा जानबूझ कर साजिश के तहत निरस्त कराया गया। अगर ऐसा नहीं होता तो वह बैंक के डायरेक्टर चुने जाते और उनको चेयरमैन बनने का मौका भी मिलता, लेकिन राजनीतिक षड़यंत्र के तहत उनका पर्चा खारिज करा दिया गया। इसी लड़ाई में सच को सामने लाने के लिए वह पहले जिला मजिस्ट्रेट और हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ चुके हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में जिला अधिकारी, एआर कोआपरेटिव, डीआर कोआपरेटिव, चुनाव अधिकारी व बैंक के चौदह डायरेक्टर सहित कुल 22 लोग पार्टी बनाए गए हैं। पीड़ित सुरेंद्र शर्मा ने कहा है कि वह इस मामले की पैरवी कर रहे हैं और उन्हें शीर्षस्थ अदालत पर पूरा भरोसा है। इस संबंध में बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजीव तिवारी ने बताया कि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है।
जिला सहकारी बैंक की चेयरमैन उमेश कुमारी ने कहा कि इस प्रकरण में पैरवी करने वाले खुद 12 करोड़ के घोटाले में फंसे हुए हैं। वह खुद को इस घोटाले से बचाने के लिए बोर्ड को प्रभावित करना चाहते हैं। इसलिए इस तरह का मामला उठा कर पैरवी कर रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट और हाईकोर्ट में उनकी आर्बिटेशन की अपील खारिज हो चुकी है। फिलहाल वह इस मामले में आगामी 28 अगस्त को अपना जवाब देने की तैयारी करा रही हैं। अन्य बोर्ड के डायरेक्टर भी इस प्रकरण में लगभग एकमत हैं। उमेश कुमारी ने कहा कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर इस मामले में एक मत है, लेकिन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के 14 सदस्यों में वर्तमान में ऐसी एकजुटता नहीं दिखती। दो बैठकों में भी ये बात सामने आ चुकी हैं।