लगातार गिर रहे भूगर्भ जलस्तर को लेकर कवायद तेज हो गई है। अब ग्राउंड वाटर एक्ट 2019 को सख्ती से लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके तहत जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों से जल दोहन का ब्योरा तलब किया गया है। जल दोहन के हिसाब से ही उनसे बिल वसूला जाएगा।
अत्यधिक जल दोहन की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने 7 अगस्त 2019 को ग्राउंड वाटर एक्ट 2019 लागू किया था। इस कानून में भूगर्भ जल के घरेलू, कृषि एवं व्यावसायिक उपयोग के मानक तय किए गए हैं। पंजीकरण सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया। घरेलू व कृषि उपयोग करने वालों पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया गया। लेकिन अत्यधिक मात्रा में भूगर्भ जल का दोहन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर डीएम की अध्यक्षता वाली जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद से एनओसी लेने, पंजीकरण कराने एवं शुल्क का प्रावधान किया गया। समिति के सदस्य सचिव एवं जिले के नोडल अफसर विजेंद्र सुमन ने बताया कि सभी औद्योगिक इकाइयों से प्रति दिन के भूगर्भ जल के खर्च का ब्योरा मांगा गया है। उसी के हिसाब से उनसे जल दोहन की फीस वसूली जाएगी।
फ्लो मीटर हुआ अनिवार्य
अलीगढ़। नोडल अफसर व लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विजेंद्र सुमन ने बताया कि सभी औद्योगिक इकाइयों में उपयोग किए जाने वाले भूगर्भ जल की मात्रा तय करने के लिए फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिये सभी को नोटिस जारी किये गये हैं।