जब लक्ष्य अटूट हो और इरादे फौलादी, तो बंदूक से निकली हर गोली इतिहास रचती है। आज से 16 साल पहले, यानी साल 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में जब अलीगढ़ की बेटी अन्नूराज सिंह ने सटीक निशाना लगाकर देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला था, तो पूरा भारत झूम उठा था। इसके बाद लंदन ओलंपिक की 22 और 25 मीटर स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बनने का गौरव भी उन्होंने अपने नाम किया।
आज कॉमनवेल्थ दिवस के खास मौके पर अमर उजाला से फोन पर खास बातचीत करते हुए अन्नूराज सिंह ने अपने उस स्वर्णिम सफर को याद किया और देश के खेल भविष्य को लेकर अपने नए संकल्पों को साझा किया।
अन्नूराज सिंह भावुक होते हुए बताती हैं कि मेरी खेल यात्रा में 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स का हमेशा एक बेहद अहम स्थान रहेगा। भारत के लिए पोडियम पर खड़े होकर स्वर्ण पदक जीतना सिर्फ एक मेडल हासिल करना नहीं था, बल्कि वह बरसों की कड़ी मेहनत और देश के मान-सम्मान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के सपने का सच होना था। आज भी जब मैं उस पल को याद करती हूं, तो रगों में वही पुराना उत्साह और रोंगटे खड़े कर देने वाला रोमांच दौड़ जाता है।
प्रोजेक्ट अमरजीत से तराशे जा रहे हैं भविष्य के चैंपियंस
अन्नूराज अब अहमदाबाद में अपनी एकेडमी के जरिए समाज और देश को वापस लौटाने के मिशन में जुट गई हैं। उन्होंने और उनके पति दिग्गज निशानेबाज गगन नारंग ने मिलकर प्रोजेक्ट अमरजीत की शुरुआत की है। इसके तहत वे प्रतिभावान और जरूरतमंद युवा एथलीटों को नि:शुल्क वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग और सहायता प्रदान कर रहे हैं। अन्नूराज कहती हैं, यह मेरे लिए सिर्फ कोई अभियान नहीं है, बल्कि भारत के खेल भविष्य को संवारने में मेरा एक योगदान है।
अन्नूराज ने देश के युवा एथलीटों को कहा कि अपने सपनों पर भरोसा रखिए। आपकी मेहनत कभी जाया नहीं जाती। शार्टकट से सफलता नहीं मिलती। चुनौतियों से न डरें। हर मुश्किल आपको और ज्यादा मजबूत बनाती है। उन्होंने इस साल स्कॉटलैंड में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय दल को ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। साथ ही उम्मीद जताई कि साल 2030 में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों का स्तर 2010 के दिल्ली खेलों से भी कहीं ज्यादा भव्य और शानदार होगा।
अलीगढ़ में टैलेंट का समंदर, पर मेडल का सूखा
एक तरफ जहां अन्नूराज सिंह देश के फलक पर चमक रही हैं, वहीं उनका गृह जनपद अलीगढ़ पिछले 16 सालों से दूसरे कॉमनवेल्थ मेडल के सूखे से जूझ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह खेल संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके चलते यहां के होनहार खिलाड़ी दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
अन्नूराज सिंह के पिता और शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसपी सिंह ने कहा, अलीगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां संसाधन बेहद सीमित हैं। प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जरूर हुए, शूटिंग रेंज भी बनाकर दी गई, लेकिन इसके बावजूद कहीं न कहीं कोई बड़ी कमी आज भी बाकी है जिसके कारण खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।