गांव शफीपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज के रूप में सुनील कुमार एवं सहायक अध्यापक के पद पर गुंजन गुप्ता लगभग पांच वर्ष पूर्व तैनात हुए थे। इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि विद्यालय में तैनाती के समय 1 से लेकर 5 की कक्षा तक मात्र 18 बच्चे ही पंजीकरण थे। गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के बाद लगभग पांच वर्षेां की मेहनत के फलस्वरूप 84 बच्चे पंजीकृत हुये। जिसमें गांव शफीपुर के साथ-साथ अन्य गांवों से भी बच्चे स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। जबकि प्राथमिक विद्यालय की इमारत न होने पर उच्च प्राथमिक की इमारत में ही शिक्षण कार्य किया जाता है।
लेकिन दो दिन पूर्व ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा राजगांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य हेतु पर्यवेक्षक के पद पर इंचार्ज सुनील कुमार एवं गुंजन गुप्ता का स्थानान्तरण कर दिया था। सोमवार की प्रात: विद्यालय का चार्ज देने पहुंचे दोनों अध्यापकगण को अभिभावकों व बच्चों ने घेर कर रोक लिया और विद्यालय के गेट पर ताला लगा दिया। साथ दोनों अध्यापकों के स्थानान्तरण को रोकने की मांग करने लगे।
ग्रामीणों ने खण्ड शिक्षा अधिकारी को सूचना देने की कोशिश की लेकिन फोन ना मिलने पर उपजिलाधिकारी अतरौली अनिल कटियार को सूचना दी। उपजिलाधिकारी अतरौली के निर्देश पर लगभग ढाई घंटे बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी गांव पहुंची। काफी देर समझाने व गेट का ताला खोलने पर बहस भी हुई। लेकिन जब तक स्थानान्तरण रोकने का आदेश ना आने तक गेट खोलने से मना कर दिया। आक्रोशित अभिभावकों को देखकर खण्ड शिक्षा अधिकारी शशिबाला ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सूचना दी। लगभग पांच घंटे बाद अभिभावकों व बच्चों का अध्यापकों के प्रति प्यार देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों अध्यापकों का स्थानान्तरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम प्रधान ने ही शिकायत कर अध्यापकों का स्थानान्तरण कराने में अहम भूमिका निभाई है। जब शिक्षण कार्य में कोई भी कमी ना होने पर भी आखिर किस प्रकार दोनों अध्यापकों का स्थानान्तरण कराया गया है।
गांव की नेमवती ने बताया कि मेरे एक पुत्र कक्षा तीन व एक पुत्री कक्षा पांच की छात्रा है। पूर्व में दोनों बच्चों को प्राइवेट स्कूल में शिक्षा ग्रहण करा रहे थे। जब गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में अच्छी शिक्षा मिल रही थी, तो बच्चों को गांव के ही विद्यालय में पंजीकृत कराया। किरन देवी ने बताया कि मेरा एक पुत्र कक्षा दो का छात्र है। अध्यापकों द्वारा स्कूल में बच्चों की पढाई करने के लिए काफी मेहनत करते हैं। सभी को शिक्षा के साथ-साथ उनको अच्छे से ध्यान भी रखते हैं। ऐसे अध्यापकों का स्थानान्तरण करना गलत है।
खण्ड शिक्षा अधिकारी की गाड़ी के आगे खड़े हो गए बच्चे
सूचना पर पहुंची खण्ड शिक्षा अधिकारी शशिबाला काफी देर अभिभावकों को समझाने के बाद मीटिंग की कह कर जाने लगी तो बच्चों ने उनकी कार के आगे आकर रोक दिया और स्थानान्तरण रोकेन के आदेश आने के बाद जाने को कहा। लेकिन काफी समझाने के बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी गांव से जाने में सफल हो पाई।
बच्चों की भावना और स्कूल निर्बाध संचालन को लेकर शिक्षक व शिक्षिका का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। - डॉ राकेश कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, अलीगढ़