अलीगढ़ के सांसद और विधायकों द्वारा सबसे ज्यादा सिफारिशी पत्र लाइसेंस को लेकर ही लिखे जा रहे हैं। लेकिन इस बार यह पत्र भी काम नहीं आ रहे हैं। क्योंकि अदालत के सख्त रुख के बाद प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया है और पूरी पड़ताल के बाद ही रिपोर्ट बनाई जा रही है। यही वजह है कि अधिकांश आवेदन निरस्त हो जा रहे हैं।
यह है वजह
एडवोकेट दिनेश कुमार कहते हैं कि करीब नौ साल पहले हाईकोर्ट ने बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने पर प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए और इस मामले में बेहद सतर्कता से काम लेने के लिए कहा। इसके बाद अधिकारियों ने इस मामले से अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए।
हजारों आवेदन पड़े हैं लंबित
किस स्तर पर कितने फीसदी (अनुमानित)
- थाना- 50 फीसदी
- क्षेत्राधिकारी- 20 फीसदी
- एसपी - 10 फीसदी
- तहसील- 10 फीसदी
- अन्य- 10 फीसदी