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कलक्ट्रेट जाने से रोकने पर सपाइयों का हंगामा, योगी के खिलाफ नारेबाजी

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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा-रालोद की संयुक्त प्रत्याशी अर्चना यादव, उनके समर्थक सदस्यों, पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों को रोके जाने के विरोध में यूनिवर्सिटी सर्किल से ठंडी सड़क, कलेक्ट्रेट गेट, शमशाद मार्केट बैरिकेडिंग तोड़ कर जमकर प्रदर्शन हुआ।
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भड़के सपाइयों ने कलक्ट्रेट गेट के सामने आगरा-अनूपशहर-मुरादाबाद हाईवे पर धरना देकर सीएम योगी मुर्दाबाद के नारे लगाए। पूर्व नगर विधायक जफर आलम को रोकने पर पुलिस और सपाइयों के बीच तीखी नोकझोंक और हाथापाई हुई।
अर्चना यादव और उनके पति संजय यादव ने सत्ता दबाव में प्रशासन पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सत्ता के दबाव में नौ सदस्यों को अचानक निरक्षर और आठ सदस्यों को रातोंरात बीमार बता कर उनके स्थान पर दूसरों से मतदान कराया गया है, जो खुलेआम दादागिरी है।
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17 सदस्यों पर दबाव बना कर उनके सहायक तैनात कर मतदान कराया गया है। इसलिए सपा चुनाव हार गई। अन्यथा वह जीत जाते। इस मनमानी के विरोध में वह राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेज रहे हैं। इसके अलावा विधिक राय लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
संजय यादव ने कहा कि उन्होंने अपने करीबी रिश्तेदार एवं हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता को पूरा प्रकरण बता कर विधिक राय ली है। जिसमें पता चला है कि इस मनमानी में पहली सुनवाई में ही इस चुनाव पर स्थगन आदेश मिल सकता है। इसलिए वह सभी तथ्यों के साथ जल्द ही अदालत पहुंचेंगे। मतदान में हुई धांधली में कानूनी कार्रवाई कराएंगे। हर हाल में ये चुनाव निरस्त कराएंगे। दोबारा से मतदान होगा और वह पुन: अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाएंगे।
पूर्व नगर विधायक जफर आलम, पूर्व कोल विधायक हाजी जमीरउल्लाह, रालोद के पूर्व विधायक भगवती प्रसाद सूर्यवंशी, पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह, सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव, रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष राम बहादुर सिंह के साथ तमाम नेताओं ने प्रदेश की योगी सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के खिलाफ जम कर प्रदर्शन किया।
सपाइयों ने आरोप लगाया कि जब भाजपा नेताओं की गाड़ियां बैरिकेडिंग से आगे कलेक्ट्रेट तक जा रही हैं तो उनके वाहनों को क्यों रोका जा रहा है। सरकारें तो आती जाती रहतीं हैं। पुलिस इस तरह की दबंगई न करे।
ये प्रदर्शन जारी था कि इसी बीच पूर्व नगर विधायक जफर आलम एएमयू के कलक्ट्रेट वाले गेट से वहां पहुंचे। वो गेट बंद था तो वह अपनी कार वहीं छोड़ कर पैदल ही शमशाद मार्केट वाले रास्ते से कलक्ट्रेट की ओर आने लगे। इस पर पुलिस ने उनको रोका। जिस पर सपाइयों से कहासुनी हुई।
महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी, महानगर महासचिव मनोज यादव, जिला उपाध्यक्ष रत्नाकर पांडेय, कृपाल सिंह और आमिर आबिद की पुलिस से तीखी नोकझोंक और हाथापाई हुई। सपाइ पुलिस को धकियाते हुए पूर्व विधायक को कलक्ट्रेट के गेट के सामने तक लेकर आए। ड्यूटी पर तैनात एक दरोगा को हटाने की मांग होने लगी। सीओ श्वेताभ पांडेय ने वहां पहुंच कर सबको शांत कराया।
इस बीच पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इस्हाक, गुड्डा यादव, राजेश सैनी, एमएस सगीर, पूर्व जिलाध्यक्ष अश्विनी शर्मा, अयाज शेरवानी, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष शहजाद अल्वी, रंजीत सिंह, लक्ष्मी धनगर, पूजा गौतम, गुलिस्ताना, संजू शर्मा, कृपाल सिंह, अहमद सईद सिद्दीकी, कालीचरन यादव सहित कई पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट के गेट के सामने सड़क पर धरना देकर प्रदर्शन किया। सपाई फिर से सीएम योगी मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। साढ़े दस बजे से तीन बजे तक लगभग चार घंटे तक सपाइयों ने प्रदर्शन किया।
सपाइयों ने कलक्ट्रेट जाने से रोकने की सूचना अपने व्हराटसएप ग्रुप पर शेयर की थी। जिसके बाद वहां कुछ ही देर में सपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की पूरी जमात एकत्र हो गई। गठबंधन के कारण रालोद नेता भी पहुंच गए थे। जिससे उनकी संख्या बढ़ गई और जोश भी बढ़ा। इसके बाद चार घंटे तक प्रदर्शन होता रहा। रह रह कर नारेबाजी होती रही। सपाई कभी एक तरफ सड़क पर बैठते तो कभी दूसरी तरफ। इस दौरान सड़क गरम होने के कारण एक स्थान पर ज्यादा देर तक धरना नहीं चला।
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