जिला पंचायत की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी ठाकुर जयवीर सिंह लगातार चौथी बार किंग मेकर के रूप में सामने आए हैं। उनके प्रयास से ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद से सुधीर सिंह पीछे हटे और विजय सिंह की जीत का रास्ता आसान हुआ।
जिला पंचायत सदस्य चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद भाजपा संकट की स्थिति में थी। उसके नौ सदस्य ही चुनाव जीत पाए थे। सपा, बसपा, रालोद एवं भीम आर्मी के 17 लोग निर्वाचित हुए थे। शेष 21 निर्दलीय थे। शुरूआती दौर में जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंह की पत्नी अंजू देवी का नाम अध्यक्ष पद के दावेदार के रूप में सामने आया।
सपा, बसपा एवं रालोद का समर्थन मिलने की चर्चा हो रही थी। कई निर्दलीयों के साथ होने का दावा किया जा रहा था। लेकिन एक जून को जयवीर सिंह की मौजूदगी में जलालपुर स्थित उनके फार्म हाउस पर राजवीर सिंह राजू भैया, ठाकुर श्यौराज सिंह, जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह एवं सुधीर सिंह की गोपनीय बैठक हुई। उस बैठक के बाद सुधीर सिंह पीछे हट गए। इसके बाद ही जिला पंचायत की राजनीति भाजपा के पक्ष में आ गई।
साल से जिपं की राजनीति मुट्ठी में
पिछले 15 साल से जिला पंचायत की राजनीति पूर्व मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह की मुट्ठी में है। वर्ष 2006 में रामसखी कठेरिया को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाकर जिला पंचायत की राजनीति पर पकड़ मजबूत की। कठेरिया के बाद 2011 में सुधीर सिंह को अध्यक्ष बनवाया।
2016 में अपने भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बैठाया। पार्टी द्वारा जयवीर सिंह को इस बार हाथरस का प्रभारी बनाया गया था। कांटे की टक्कर में अलीगढ़ से विजय सिंह एवं हाथरस से सीमा उपाध्याय को जिताने में कामयाबी मिली।