पारा चढ़ने के साथ ही रोडवेज की वातानुकूलित बसों में सीटों के लिए मारामारी शुरू हो गई है। सीट न मिलने पर यात्री इस गर्मी में पसीना बहाते हुए सामान्य बसों में सफर करने को मजबूर हैं। इसकी वजह रोडवेज के बेड़े में वातानुकूलित बसों की खासी कमी है। शहर के तीन रोडवेज बस अड्डों से पूरे दिन में लगभग 27 वातानुकूलित बसें नोएडा, आगरा, लखनऊ और मुरादाबाद के लिए चलती हैं। इन वातानुकूलित बसों में यात्री सीट पाने के लिए बस अड्डे पर पहुंचकर घंटों इंतजार करते हैं। उसके बाद भी उन्हें सीट नहीं मिलती है। यात्रियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में वातानुकूलित रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
सैटेलाइट बस अड्डे से नौ वातानुकूलित बस नोएडा और दो बस मुरादाबाद के लिए चलती हैं। मसूदाबाद बस अड्डे से एक वातानुकूलित बस वृंदावन और एक बस जयपुर जाती है। जबकि गांधीपार्क बस अड्डे से पांच वातानुकूलित बस लखनऊ और छह बस आगरा रवाना होती हैं। मसूदाबाद की जयपुर वाली और गांधीपार्क की आगरा-लखनऊ जाने वाली वातानुकूलित बसों में सीटों के लिए अधिक मारामारी होती है। इन बसों में 40 से 50 फीसदी टिकट ऑनलाइन बुक हो जाती हैं। बाकी सीटें यात्रियों की उपलब्धता पर निर्भर रहती हैं।
गांधीपार्क बस अड्डे में जैसे ही बस अंदर घुसती है। वैसे ही भर जाती है। जबकि अन्य जनपदों से चलने वाली बसों में सिर्फ चार-पांच सीटें ही उपलब्ध हो पाती हैं। यात्री घंटों का इंतजार कर गर्मी से बेहाल हो जाते हैं। इसके बावजूद उन्हें सीटें नहीं मिल पा रही है। शहर की सड़कों पर लोग हाथ देकर बस को रुकवाते हैं। लेकिन सीट के अभाव में चालक-परिचालक किसी को नहीं बैठाते हैं। यात्रियों का कहना है कि वातानुकूलित बसों की संख्या बढ़नी चाहिए। हर आधा घंटे में आगरा और घंटे भर में लखनऊ की वातानुकूलित बस चलनी चाहिए। वातानुकूलित बस न मिलने से भीषण गर्मी में सामान्य बसों में सफर करना पड़ रहा है।
यह है किराया
नोएडा के लिए सामान्य बस में 163 रुपये की टिकट काटी जाती है। जबकि वातानुकूलित बस में 246 रुपये की टिकट है। आगरा जाने के लिए यात्री सामान्य बसों में 105 रुपये तो वातानुकूलित बस में 160 रुपये तक चुकाते हैं। जबकि लखनऊ तक सामान्य बस में 450 रुपये का टिकट कटता है तो वातानुकूलित बस में 695 या 798 रुपये का टिकट कटता है।
- आगरा जाने के लिए लिए 12 बजे से गांधीपार्क बस अड्डे पर वातानुकूलित बस का इंतजार किया। एक बजे के लगभग सीट मिल पाई। गर्मी को देखते हुए वातानुकूलित बसों की संख्या बढ़नी चाहिए। -रविंद्र ठाकुर, पहासू।
- गर्मी में वातानुकूलित बस के बिना बच्चों को सफर नहीं करा सकते हैं। दुबे पड़ाव पर दो वातानुकूलित बसों में चढ़ने का प्रयास किया। दोनों बसों में एक भी सीट खाली नहीं थी। बस अड्डे पर आकर घंटों तक इंतजार किया। तब कहीं जाकर सीट नसीब हुई। -महीपाल सिंह, नगला बीज, कासगंज।
- गर्मियों में वातानुकूलित बसों में सीट से अतिरिक्त एक भी यात्री को नहीं बैठाया जाता है। गर्मियों में वातानुकूलित बसों की मांग बढ़ जाती है। लखनऊ मुख्यालय को वातानुकूलित बसों की डिमांड भेजी है। पांच-दस वातानुकूलित बसों का संचालन विभिन्न रूट पर हो जाए तो समस्या का निदान हो जाएगा।
-मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम।