इस घटना की शनिवार को कोतवाली परिसर व आसपास के इलाके में जबरदस्त चर्चा रही। इस दौरान एक चाहत नाम के पुलिस मित्र का नाम खूब सुर्खियों में रहा। वह दरोगा के बेहद खास है। उसे दोपहर में दरोगा ने फोन कर थाने बुलाया था, मगर वह सोता रह गया। इसलिए उस समय तक थाने नहीं पहुंच पाया। अगर वह थाने पहुंचता तो शायद उस समय मुंशियाने में मौजूद होता। उसने इस बात का जिक्र किया कि अगर वहां होता तो शायद वह इस गोली का निशाना बन सकता था।
मॉनीटरिंग पर सवाल..सत्यापन के लिए थाने-चौकी बुलाना आम बात
कोतवाली में हुई घटना तो एक उदाहरण है। मगर थाना व चौकी स्तर पर सत्यापन के नाम पर आम लोगों को बुलाना आम बात है। सबसे बड़ी बात ये है कि इन दिनों पुलिस द्वारा महिला सम्मान के लिए ऑपरेशन जागृति चलाया जा रहा है। बावजूद इसके महिलाओं को इस तरह बुलाया जाता है। उनके मान सम्मान का कतई ध्यान नहीं रखा जाता और इसी तरह बुलाए जाने पर एक महिला एक इत्तेफाकिया दुर्घटना में जिंदगी और मौत से जूझने को मजबूर है। मगर निचले स्तर पर हो रही लापरवाही व अनियमितता पर अफसरों का मौन समझ से परे है।
पुलिस स्तर से पासपोर्ट, हथियार से लेकर अन्य किसी भी तरह के सत्यापन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था है। आवेदन करने पर उसे संबंधित थाने व चौकी पर भेजा जाता है। वहां से हल्का प्रभारी व बीट प्रभारी आवेदक को फोन करते हैं। उससे उसके घर आने का समय मांगते हैं। जब वे समय दे, तब वहां पहुंचते हैं। उसका सत्यापन करने के बाद रिपोर्ट लगाकर देते हैं। पता, आम शौहरत के सत्यापन की रिपोर्ट लगाकर देते हैं। अगर कोई आपराधिक रिकार्ड होता है तो उसको भी दर्ज कर रिपोर्ट लगाई जाती है। मगर यहां रिपोर्ट लगाने के नाम पर चंद रुपयों की खातिर बिना थाने बुलाए ये सब नहीं किया जा रहा। जबकि इसकी एक मॉनीटरिंग व्यवस्था है। कितने आवेदन थाना चौकी स्तर पर लंबित हैं। उनके सत्यापन व रिपोर्ट लगाने की मॉनीटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती है। मगर यहां की व्यवस्था पर इस घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है।
इस घटना में परिवार से मिली जानकारी पर उजागर हुआ है कि महिला का पति पिछले कई वर्ष से बीमार है और बिस्तर पर है। महिला द्वारा अबकी बार रमजान में हज पर जाने का मन बनाया गया था। इसी के लिए पासपोर्ट आवेदन किया गया था। मगर अब शायद ही वह हज पर जा पाए।
विभागीय जांच के लिए देखे जा रहे पुराने कृत्य
जिला पुलिस ने दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच के लिए कई पत्रावली खोल दी हैं। जिसमें लापरवाही, अनुशासन व मुकदमा संबंधी पत्रावली खोली जा रही हैं। इसमें दरोगा के पुराने अनुशासन संबंधी कृत्य भी देखे जा रहे हैं। जिसमें दरोगा द्वारा गाली दिया जाने का वीडियो, आगरा में निलंबन आदि पर ध्यान दिया जा रहा है।
विपक्षी दलों ने गिरफ्तारी को बनाया मुद्दा..सियासी लोगों का तांता
इस घटना के बाद पुलिस बेहद सतर्क है। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। मगर राजनीतिक दल भी पीछे नहीं है। विपक्षी दलों ने घटना में दरोगा की गिरफ्तारी को मुद्दा बनाते हुए पुलिस व सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने जहां मामले की जांच व आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक प्रतिनिधि मंडल का गठन किया है। वहीं सपा के पूर्व विधायक ने डीजीपी से मिलना तय किया है। इधर, बसपा नेता दिन भर परिवार के साथ सक्रिय दिखाई दिए हैं। जख्मी महिला का हाल चाल जानने के लिए शनिवार को सपा के पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव विवेक बसंल, प्रदेश महासचिव परवेज खां, राजेश राज जीवन, बसपा के मेयर प्रत्याशी रहे सलमान शाहिद आदि तमाम नेता पहुंचे।
बाजार खुला, सामान्य रहे हालात
कोतवाली में घटना के बाद 8 दिसंबर को बाजार को बंद करा दिया गया था। सीओ प्रथम अभय पांडेय ने कई थानों के अमले के साथ पहले 8 दिसंबर की शाम फिर 9 दिसंबर सुबह बाजार खुलवाया। दुकानदारों को समझाया गया। बताया गया कि बाजार बंद होने शहर में एक गलत संदेश जाता है। महिला की हालत में धीरे धीरे सुधार हो रहा हे। हालात भी पूरी तरह सामान्य है तो फिर बाजार बंद करने की क्या जरूरत है। पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद दुकानदारों ने बाजार खोला। फॉरेंसिक टीम को मौके पर मिले खोखा को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। पुलिस मित्रों व एसपीओ स्तर से निगरानी के साथ बाजार में पुलिस बल भी सक्रिय रखा गया।