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स्क्रैप कारोबारी की मौत : दो डॉक्टरों सहित एक मजिस्ट्रेट की गर्दन फंसी

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कोरोना संक्रमण से मौत के आगोश में समाये मानिक चौक के 55 वर्षीय स्क्रैप कारोबारी की मौत मामले में कारोबारी को घर से ले जाने वाले डॉक्टर, छेरत एल-1 के प्रभारी डॉक्टर और मजिस्ट्रेट की गर्दन फंस गई है। प्रथमदृष्टया तीनों को दोषी मानते हुए डीएम ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दो दिन के भीतर जवाब मांगा है।
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एक सप्ताह पहले कोरोना संक्रमित पाए गए मानिक चौक के स्क्रैप कारोबारी को घर से लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी। घर से ले जाकर उनको राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज छेरत में क्वारंटीन किया गया था। क्वारन्टीन अवधि के दौरान उनका स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ के लिए रेफर किया गया। जेएनएमसी पहुंचने पर डॉक्टर की टीम ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप था कि स्वास्थ्य टीम के साथ आए डाक्टर ने डॉयबिटीज व ब्लड प्रेशर के मरीज कारोबारी को अपने साथ दवाएं तक नहीं ले जाने दीं।
छेरत अस्पताल में उन्हें न खाना दिया गया न सोने को बिस्तर। कारोबारी के बेटे ने सीएमओ से जल्द कोरोना परीक्षण कराकर होम क्वारंटीन करने का अनुरोध किया तो वह टालते रहे। इस पर परिवार वालों ने उनको निजी अस्पताल में ले जाने की पेशकश की। मगर, उनको ले जाने नहीं दिया गया।
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आरोप है कि छेरत के स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से जब उनकी हालत बिगड़ी तो मेडिकल ले जाया गया। जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बीते बुधवार को इस संबंध में डीएम चंद्र भूषण सिंह ने सीडीओ अनुनय झा को जांच के आदेश दिए थे। सीडीओ ने मामले में स्वास्थ्य विभाग सहित मृतक के परिवार वालों के बयान दर्ज किए। बयानों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को शनिवार को सौंपी गई। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद दोनों डाक्टर व मजिस्ट्रेट को कारण बताओ नोटिस सौंपा गया है। तथ्यपूर्ण जवाब न मिलने पर तीनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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