साथा चीनी मिल में पिराई सत्र का उद्घाटन करते जिलाधिकारी।
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साथा चीनी मिल का बुधवार को जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने विधिवत उद्घाटन किया। हवन यज्ञ करने के साथ ही बैलों की पूजा की गई। इसके बाद उनको गुड़-चना खिलाया गया। साथ ही बॉयलर में एक गन्ना डालकर पेराई भी की गई। इस बार चीनी मिल में 7 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा गया है। डीएम ने जिम्मेदारों को चेताते हुए कहा कि किसी भी गन्ना किसान का भुगतान न रोका जाए। मशीनों को दुरुस्त रखा जाए। गन्ने की पेराई किसी भी सूरत में बंद नहीं होनी चाहिए। हर हाल में लक्ष्य की प्राप्ति फरवरी माह में ही कर ली जाए। बता दें कि पिछली बार नौ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 6.15 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। इसको लेकर शासन में काफी किरकिरी हुई थी।
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. सुभाष यादव ने बताया कि जनपद में इस वर्ष लगभग 5 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल है। साथा चीनी मिल पर 7 लाख क्विंटल गन्ना पिराई का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, चीनी मिल के जीएम रामशंकर ने डीएम को आश्वस्त किया कि इस बार लक्ष्य की प्राप्ति कर ली जाएगी। किसानों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इस अवसर पर सीडीओ अनुनय झा, एडीएम वित्त विधान जायसवाल, एसडीएम कोल अनीता यादव व अन्य अधिकारी व किसान मौजूद रहे।
14 दिन में भुगतान के निर्देश
डीएम ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार गन्ना किसानों को प्रत्येक दशा में 14 दिन के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी अगर कोई लापरवाही होती है तो संबंधित के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले में 45 हजार गन्ना किसान, घट रहा रकबा
जिले में 45 हजार गन्ना किसान हैं। इसके बाद भी हर साल गन्ने का रकबा घट रहा है। इसके पीछे का कारण किसानों को समय से गन्ना खरीद का भुगतान न होना है। 70 के दशक में स्व. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों साथा मिल की नींव रखी गई थी। इसके बाद अलीगढ़ जिले ने प्रदेश को चंद्रभान गुप्ता और कल्याण सिंह के तौर पर दो मुख्यमंत्री और सुरेंद्र सिंह चौहान, जयवीर सिंह, दलवीर सिंह के तौर पर तीन मंत्री दिए। इसके बाद भी इसका दशा नहीं सुधरी।
हर साल घट रहा रकबा
वर्ष रकबा (हेक्टेयर में)
2012-13 13756
2013-14 17697
2014-15 12890
2015-16 10735
2016-17 10941
2017-18 11920
2018-19 8898
2019-20 6500
2020-21 5000