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अलीगढ़ : 85 लाख रुपये खर्च...मगर लगातार 48 घंटे भी नहीं चली साथा मिल

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साथा चीनी मिल में 10 दिन से बंद होने पर लदे खड़े टैक्टर ट्रॉली में गन्ने। - फोटो : CITY OFFICE
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आशीष श्रीवास्तव
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गन्ना किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दस दिनों से साथा चीनी मिल में पेराई ठप पड़ी है। ऐसे में मिल के बाहर गन्ने से लदी 300 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं। मिल में गन्ने का अंबार लगा हुआ है। अब किसान सवाल उठा रहे हैं कि करीब एक माह की देरी से चली चीनी मिल की मरम्मत के लिए आया 85 लाख रुपया आखिर कहां खर्च हो गया। अगर सही से मरम्मत र्हुई है तो मिल सात जनवरी से शुरू हुए पेराई सत्र के बाद से लगातार 48 घंटे भी क्यों नहीं चल सकी।
साथा चीनी मिल पिछले पांच-छह सालों से गन्ना किसानों के लिए अभिशाप बनी हुई है। इस सत्र में लंबे इंतजार के बाद सात जनवरी से चीनी मिल का संचालन शुरू हुआ था। एक-दो दिन चलने के बाद मिल की मशीनरी में खराबी के चलते पेराई ठप हो गई। करीब 14 दिन बाद किसी तरह मिल में 24 जनवरी से पेराई फिर शुरू हुई। लेकिन बार-बार तकनीकी खराबी के कारण मिल 48 घंटे भी लगातार नहीं चली। तीन फरवरी तक चलने के बाद मशीनरी फिर ठप हो गई। तब से दस दिन हो गए हैं, लेकिन मिल का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इस सत्र में अब तक मात्र 1.16 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो सकी है। जबकि करीब सात लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मिल की मरम्मत के लिए आया 85 लाख रुपया आखिर कहां गया। मिल प्रबंधन इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल ने बताया कि चीनी मिल बंद होने के कारणों की जांच कराई जाएगी। साथ ही मरम्मत पर खर्च का हिसाब भी दिखवाया जाएगा।
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मरम्मत के नाम पर पांच साल में फूंके करोड़ों रुपये
साथा चीनी मिल की मरम्मत में पिछले पांच साल में करोड़ों रुपया पानी की तरह बह गया है, लेकिन नतीजा सिफर रहा है। मिल का संचालन समुचित तरीके से न होने से गन्ना किसानों को भीषण सर्दी में कई कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। इस सत्र में भी मिल की मरम्मत के लिए सवा करोड़ रुपया स्वीकृत हुआ था। पहली किस्त का 85 लाख रुपया आ गया है और मरम्मत के नाम पर इसे खर्च किया जा चुका है।
मरम्मत के नाम पर अब तक स्वीकृत
- वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपया
- वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपया
- वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपया
- वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपया
- वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपया
पेराई बंद होने से किसानों का प्रदर्शन, जीएम का किया घेराव
साथा चीनी मिल में पिछले दस दिन से गन्ने पेराई बंद होने से नाराज किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने रविवार को साथा चीनी मिल किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले मिल के गेट पर धरना प्रदर्शन किया और जीएम का घेराव किया। किसानों ने मांग की कि मिल पर आया किसानों का गन्ना खरीदकर उसे आसपास की मिलों में पेराई के लिए भेजा जाए।
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किसान नेता डॉ शैलेंद्र पाल सिंह ने कहा कि चीनी मिल में 85 लाख रुपए मरम्मत के नाम पर खर्च होने के बावजूद आज तक चीनी मिल लगातार 48 घंटे भी नहीं चली। 10-10 दिन तक किसान भीषण ठंड में साथा चीनी मिल पर खुले आसमान के नीचे इंतजार करने के लिए मजबूर है। रविवार को यहां 300 से अधिक गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं। लेकिन किसानों की कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। किसान का गन्ना खरीद कर अन्य चीनी मिल पर भिजवाया जाए नहीं तो किसान आंदोलन को मजबूर होगा रोबी ठाकुर ने कहा कि प्रबंधन किसानों की कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इस दौरान मिल महाप्रबंधक रमा शंकर ने आश्वासन दिया कि जिलाधिकारी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को चीनी मिल की स्थिति से अवगत करा कर गन्ना को दूसरी चीनी मिलों पर भिजवाने की व्यवस्था के लिए आग्रह किया जाएगा। प्रमेंद्र चौहान ने बताया कि किसानों ने बैठक कर निर्णय लिया है कि वे सोमवार को समस्या को लेकर सुबह 11 बजे डीएम से मिलेंगे। इस मौके पर अंकित चौहान, भगवानदास चौहान, पुष्पेंद्र बॉबी, यतेंद्र चौहान, दीना शर्मा, टीटू चौहान, सुदेश सिंह, बंटी कश्यप, विनोद कश्यप, अमित शर्मा, कन्हैया, आकाश शर्मा, बलवीर सिंह, कौशल चौहान आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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