चंडौस क्षेत्र के गांव जामुनका में पारिवारिक झगड़े के दौरान पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद सगीर की मौत कमजोर फेफड़े होने की वजह से हुई। यह खुलासा दो डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में हुआ है। डॉक्टरों की राय है कि मारपीट के दौरान भागदौड़ या पुलिस के पकड़ने पर भागते समय उसकी सांस उखड़ी और दहशत में जान चली गई। इधर, इस मामले में पुलिस ने हत्या में नामजद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर रविवार को जेल भेज दिया है।
रात में ही पुलिस ने सगीर के शव को पोस्टमार्टम केंद्र भिजवा दिया था, जहां डॉ. मनोज चतुर्वेदी व डॉ. स्कंदराजा के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। इस दौरान युवा रालोद नेता राजा भइया व कांग्रेस नेता बुलंदशहर यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष जियाउर्रहमान पोस्टमार्टम केंद्र पहुंच गए। दिन में काफी गहमागहमी के बाद पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम सूत्रों के अनुसार जांच में पाया है कि सगीर के फेफड़े कमजोर थे, इसलिए कार्डियक शॉक में मौत हुई है। माना जा रहा है कि मारपीट, झगड़े या पुलिस के पकड़े जाने के दौरान भागते समय उसकी सांस उखड़ी और मौत हो गई। रात में पोस्टमार्टम के बाद ये नेता शव को लेकर गांव लेकर पहुंचे।
इधर, पुलिस ने इस मामले में हत्या के पांच आरोपियों अफलातून, मुन्ना उर्फ मुनफक्कार, आरिफ, फरहीम निवासी बरारी अहमदगढ़ बुलंदशहर और मृत सगीर के छोटे बेटे की पत्नी जवीना निवासी जामुनका को जेल भेज दिया है।
तो क्या पुलिस ने चलाया डंडा, शरीर के पिछले हिस्से पर नीले निशान
पोस्टमार्टम के दौरान एक तथ्य यह भी उजागर हुआ कि सगीर के शरीर के पिछले हिस्से पर जांघ के नीचे कुछ नीले निशान (नीलगू) थे। ये मारपीट के संभव नहीं लग रहे। ये सवाल खड़ा कर रहे हैं कि कहीं पुलिस ने सगीर पर डंडा तो नहीं चलाया। इसे लेकर पुलिस अभी जांच कर रही है। एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट इस आरोप को तय करेगी।