प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. आदित्य मुखर्जी ने कहा कि आरएसएस के स्कूलों में जहर बोया जा रहा है। पूरे देश में पढ़ाए जा रहे कक्षा छह के पाठ्यक्रम में धर्म के नाम पर देश को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रो. मुखर्जी रविवार शाम को एएमयू में व्याख्यान दे रहे थे। छात्रों के ग्रुप इतिहास के कारीगर द्वारा शुरू किए गए व्याख्यान श्रृंखला ‘इंडिया : दी रोड टू नेशन एंड फ्रीडम’ के अंतिम दिन उन्होंने कहा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश में दो तरह की शक्तियां सक्रिय थी। एक वे थे तो अंग्रेजों का साथ दे रहे थे। इसमें हिंदू महासभा एवं मुुस्लिम लीग थे।
इन संगठनों ने कभी अंग्रेजों के खिलाफ नहीं बोला। एक-दूसरे के खिलाफ जरूर बोलते रहे। दूसरे तरह भगत सिंह एवं महात्मा गांधी जैसे लोग थे। वैचारिक भिन्नता के बावजूद ये लोग अंग्रेेजों के खिलाफ एक थे। इन लोगों ने कभी हिंदुस्तानी कौम को विभाजित करने का प्रयास नहीं किया।
उन्होंने हिंदूवादी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता के आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद का कभी साथ नहीं दिया, आज राष्ट्रवाद की बात कर रहे है। इससे पूर्व शुक्रवार को प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. मृदुला मुखर्जी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया था। उन्होंने सावरकर, तिलक से लेकर गंाधी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सावरकर का ताल्लुक कभी राष्ट्रवादी आंदोलन से नहीं था।