अगर किसी बहन के भाई न हो तो वह अपने पिता, गुरु, मित्र, चाचा या किसी भी सम्मानित व्यक्ति के, जिसे वह अपनी नजर में भाई जैसा रक्षक मानती हो उसके राखी बांध सकती है।
भगवान कृष्ण और अन्य देवताओं के राखी बांधना
भगवान कृष्ण या भगवान भोलेनाथ के राखी बांधी जा सकती है, जो शुभ माना जाता है।
फैंसी राखी और घर की बनी वैदिक राखी
आजकल के जमाने में जो फैंसी राखियां चल रही हैं, उन्होंने वैदिक राखी को भारतीय सभ्यता से अलग कर दिया है। वैदिक सभ्यता में जो राखी बनाई जाती थीं, उनमें विशेष रूप से पांच चीजों की आवश्यकता होती थी। जिनमें दूर्वा घास, अक्षत यानि कि चावल, केसर और सरसों के दाने विशेष रूप से प्रयोग किए जाते हैं।
रक्षाबन्धन पर श्रवणकुमार की पूजा
इस दिन घरों में मातृ-पितृ भक्त श्रवणकुमार की याद में सोना या सोन रखे जाते हैं। उनका रोली-चावल से पूजन कर लड्डू, सेवईं या मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। उन पर राखी लगाई जाती है । सोन पूजा करने का कारण यह है कि राजा दशरथ के बाण से श्रवणकुमार की मृत्यु हो गयी थी। राजा दशरथ ने श्रवणकुमार के माता-पिता को आश्वासन दिया कि श्रावणी के दिन श्रवण पूजा की जाएगी। इसी कारण रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले राखी श्रवणकुमार की याद में सोन को अर्पण करते हैं।