अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में परतीय मृदा पर जलीय बहाव पर शोध हुआ। इस शोध की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी के जेडएच कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उप्र (यूपीसीएसटी) ने दी थी। शोध परियोजना के लिए 6.5 लाख की धनराशि भी स्वीकृत की गई थी। परियोजना के मुख्य अन्वेषक व विभाग के अध्यक्ष प्रो. जावेद आलम ने बताया कि यूपीसीएसटी ने विभाग को दो वर्ष की अवधि की शोध परियोजना की मंजूरी दी थी।
यह परियोजना का शीर्षक एन एक्सीपेरिमेंटल स्टडी ऑन परमिआबिलिटी ऑफ लेयर्ड साइल्स पैरल्ड टू दी बेडिडंग प्लेन है। शोध के एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद काफी सह अन्वेषक हैं । प्रो. जावेद ने कहा कि परियोजना पर कार्य एक फरवरी-2019 से शुरू हुआ था। मृदा एक प्राकृतिक छलनी की तरह व्यवहार करती है, जो जल में उपस्थित विभिन्न दूषित कणों को पृथ्वी की ऊपरी सतह पर रोक देती है।
प्रकृति में मृदा परतीय स्वरूप में पायी जाती है। इन परतों में जल क्षैतिज या लंबवत प्रवेश करता है। स्तरित मिट्टी में क्षैतिज दिशा में जल के बहाव पर शोध किया गया। प्रो. जावेद ने कहा कि शोध में पाया गया कि जल के अत्याधिक दोहन व दुरुपयोग से भूजल स्तर में गिरावट आई है। परियोजना के परिणाम में जलभृत प्रबंधन, जल संरक्षण व भूजल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, कृत्रिम पुनर्भरण, मत्स्य पालन के लिए तालाब, पोखर के नवनिर्माण व जीर्णोद्धार के लिए उपयोगी साबित होंगे।