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ट्रेनों में 10-15 दिनों की वेटिंग बढ़ा रही मुश्किल

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कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद अनलॉक सिस्टम में व्यवस्थाएं पटरी पर लौट रही हैं। मगर, ट्रेनों के पूरी तरह से पटरी पर न लौटने के चलते लोगों को भारी परेशानी हो रही है। एक तो जनरल कोच खत्म कर दिए हैं। दूसरी ओर ट्रेनों की संख्या सीमित है। इसके चलते लोगों को समय पर कंफर्म रिजर्वेशन नहीं मिल पा रहा है। अलीगढ़ जंक्शन पर ठहराव वाली सभी छह ट्रेनों में 10 से 15 दिन की वेटिंग है। इधर, रोडवेज बसों का संचालन भी सिर्फ प्रदेश के भीतरी जिलों तक सीमित होने से यात्रियों पर दोहरी मार पड़ रही है। अपातकाल में कहीं जाने के लिए निजी वाहन करना पड़ रहा है, जो जेब पर बहुत भारी पड़ रहा है।
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अनलॉक प्रथम के लागू होने के साथ ही रेलवे ने अलीगढ़ जंक्शन पर छह सवारी ट्रेनों के स्टॉपेज का फैसला किया था। इनमें वैशाली एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस, गोमती एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, महानंदा एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस हैं। इन ट्रेनों में जनरल कोच खत्म कर दिए हैं। लोग सिर्फ रिजर्वेशन होने पर यात्रा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में इन ट्रेनों में 10 से 15 दिन की वेटिंग चल रही है। वर्तमान में हर ट्रेन में 100 से अधिक वेटिंग स्लीपर और 55 से अधिक एसी कोच में है। इधर, लोकल पैसेंजर ट्रेनें भी बंद चल रही हैं। दिल्ली और कानपुर तक जाने वाले यात्री भी मुख्य ट्रेनों के भरोसे हैं। सीएमआई संजय शुक्ला के मुताबिक, रेलवे बोर्ड के निर्देशों पर ट्रेनों को चलाया जा रहा है। वर्तमान में सितंबर के पहले सप्ताह में यात्रा करने वालों के लिए कंफर्म टिकट मौजूद हैं। मगर, इसी माह यात्रा करने को टिकट खरीदने वाले लोगों को उसके कंफर्म होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
रोडवेज बसों को पास की सवारी नहीं, दूर वह जा नहीं रहीं
रोडवेज को लॉकडाउन के दौरान से लगातार घाटा हो रहा है। अलीगढ़ परिक्षेत्र की 192 बसों को सरेंडर भी किया जा चुका है। रोडवेज के स्थानीय अधिकारियों के सामने दोहरा संकट यह आ गया है कि वह प्रदेश के बाहर बसों का संचालन नहीं कर सकते हैं। वहीं, पास के जिलों के यात्री उनको कम मिल रहे हैं। ऐसे में रोडवेज को अपने खर्चे निकालना मुश्किल हो गया है। शासन स्तर से कमाई बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आरएम परवेज खान के मुताबिक शासन के निर्देश पर ही बसों का संचालन किया जा रहा है। अपेक्षाकृत सवारियों के न मिलने से निगम को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस नुकसान से बचने के लिए पिछले माह बसों को सरेंडर किया था।
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