- दोपहर 2:46 बजे कोल विधायक अनिल पाराशर को फोन किया गया। कुछ देर घंटी बजने के बाद फोन उठ गया। विधायक ने बताया कि उनका फोन रिसीव अवश्य होता है। सरकारी महकमों में सुनवाई न होने के फोन अक्सर आते हैं।
- दोपहर 2:49 बजे शहर विधायक मुक्ता राजा को फोन किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं मिला।
- दोपहर 3:12 बजे इगलास के विधायक राजकुमार सहयोगी को फोन किया, लेकिन उनका तो नंबर बंद जा रहा था। वैसे तो उनके फोन पर मिस कॉल का मैसेज भी गया होगा लेकिन विधायक जी ने पलटकर फोन नहीं किया।
- दोपहर 3:13 बजे बरौली के विधायक एवं पूर्व मंत्री ठा. जयवीर सिंह को फोन किया गया, लेकिन उनका नंबर स्विच ऑफ था। मिस कॉल का मैसेज उनके फोन पर आया होगा। लेकिन फोन किसने किया था। क्यों किया था यह जानने की जहमत उन्होंने भी नहीं उठाई।
- दोपहर 3:15 बजे अतरौली के विधायक एवं शिक्षा मंत्री संदीप सिंह को फोन किया गया। काफी देर घंटी बजने के बाद भी फोन नहीं उठा। हमें उम्मीद थी कि उनका फोन आएगा लेकिन नहीं फोन नहीं आया।
- दोपहर 3:15 बजे छर्रा के विधायक रविंद्र कुमार सिंह को फोन किया गया। कुछ देर घंटी बजने के बाद उनका फोन उठ गया। विधायक ने बताया कि उनका फोन कभी बंद नहीं रहता। जनता की समस्याओं का समाधान कराना उनकी प्राथमिकता है।
- शाम 6:37 पर खैर के विधायक सुरेंद्र दिलेर को फोन किया गया। कुछ देर घंटी बजने के बाद फोन काट दिया गया। हमें लगा कि फोन काटा तो हो सकता है कि कहीं व्यस्त होंगे और थोड़ी बहुत देर में फोन आ जाएगा। लेकिन उनका वापस फोन नहीं आया।
अलीगढ़ के सांसद का फोन उठा नहीं, हाथरस सांसद का लगा ही नहीं
- दोपहर तीन बजकर 21 मिनट पर अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम को फोन किया गया। उनका सीयूजी नंबर ऑफिस में था, वहां फोन रिसीव करने वाली महिला कर्मचारी ने सांसद से बात करने के लिए दूसरा नंबर दिया। दूसरे नंबर पर काफी देर घंटी बजती रही लेकिन फोन नहीं उठा। सांसद ने मिस कॉल देखकर भी वापस फोन नहीं किया।
- वहां दोपहर को तीन बजकर 22 मिनट पर हाथरस के सांसद अनूप प्रधान को फोन किया गया, लेकिन उनका नंबर सेवा में नहीं बता रहा था।
- दोपहर तीन बजकर 35 मिनट पर एमएलसी ऋषिपाल सिंह को फोन मिलाया गया, लेकिन उनका नंबर सेवा में नहीं था। बार-बार यही आवाज आती रही।
- दोपहर तीन बजकर 36 मिनट पर एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह को फोन किया गया, लेकिन उनका नंबर भी सेवा में नहीं बताता रहा।
- दोपहर तीन बजकर 37 मिनट पर एलएलसी तारिक मंसूर को फोन किया गया। काफी देर तक घंटी बजने के बाद भी फोन नहीं उठा और न ही पलट कर फोन आया।
जिला पंचायत अध्यक्ष का फोन तत्काल उठा, महापौर ने मिस कॉल देख सवा घंटे बाद फोन किया
- दोपहर को तीन बजकर 39 मिनट पर जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह को फोन किया गया। कुछ देर घंटी बजने के बाद फोन उठा। उन्होंने बताया कि वह अपना फोन जनता की सेवा में हमेशा चालू रखती हैं। ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के संबंध में अक्सर फोन आते हैं। जमीनों पर कब्जे और पारिवारिक विवाद ज्यादा आते हैं। समझौते के तहत विवाद निपटाने पर ज्यादा जोर रहता है।
- वहीं शाम छह बजकर 38 मिनट पर महापौर प्रशांत सिंघल को फोन किया गया, लेकिन काफी देर घंटी बजने के बाद भी फोन नहीं उठा। शाम सात बजकर 55 मिनट पर महापौर ने पलट कर फोन किया।
देहलीगेट निवासी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि पुराने शहर में गंदगी की समस्या से लोग परेशान रहते हैं। इस संबंध में विधायक और स्थानीय पार्षद को फोन करके जानकारी देने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन ही नहीं उठा। कृष्ण विहार निवासी सोनू शर्मा, मयंक, सुरेश ने बताया कि उनके इलाके में नाले चोक हैं, इसके लिए उन्होंने विधायक को फोन किया था। लेकिन संपर्क नहीं हुआ। उस्मानपाड़ा निवासी मोहसिन रजा और सलमान ने बताया कि उनके क्षेत्र में कूड़ा न उठने की समस्या रहती है, इसके लिए कई बार जनप्रतिनिधियों को फोन किए गए, लेकिन फोन नहीं उठे। बाद में नगर निगम में शिकायत की गई, तब समस्या का समाधान हुआ।
विधायकों का हर हाल में फोन उठाना चाहिए... सरकार ने सीयूजी नंबर दे रखे हैं
भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला ने बताया कि सरकार की तरफ से सभी जनप्रतिनिधियों को सीयूजी नंबर आवंटित किए गए हैं। यह नंबर हर हाल में उठना चाहिए। क्योंकि अगर किसी पर कोई परेशानी आती है तो वह अपने क्षेत्रीय विधायक, सांसद या अन्य जनप्रतिनिधियों को ही फोन मिलाता है। फोन न उठाना गंभीर मामला है। इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को दी जाएगी।
सभी जनप्रतिनिधियों से बात करेंगे: शाक्य
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य ने बताया कि अगर कोई जनप्रतिनिधि फोन नहीं उठाते हैं तो यह गंभीर मामला है। इस संबंध में वह जनप्रतिनिधियों से खुद बात करेंगे। हालांकि सभी को फोन उठाना चाहिए। अगर कहीं व्यस्त हैं तो मिस कॉल देखकर बाद में कॉल की जा सकती है।
मुख्यमंत्री के आदेशों पर भी नहीं दे रहे ध्यान
जनसमस्याओं का शीघ्र समाधान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में है। इसके लिए मुख्यमंत्री प्रदेश के सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार आदेश दे चुके हैं। प्रदेश में कई मामले ऐसे सामने आए हैं, जिसमें शिकायतों पर ध्यान न देने के कारण बड़ी घटनाएं हुईं। सूबे में भाजपा की सरकार है और अलीगढ़ जिले में सभी प्रमुख जनप्रतिनिधि भाजपा के हैं, फिर भी मुख्यमंत्री के आदेश पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठ रहे हैं।