अक्सर हथियार संचालन या रखरखाव में लापरवाही देखने को मिल जाती हैं। किसी जमाने में थ्री नॉट थ्री रायफल थामने वाले सिपाहियों को अब इंसास रायफल व लैपर्ड पर पिस्टल दी गई हैं। मगर वे अत्याधुनिक हथियारों की बारीकियों से परिचित नहीं हैं। इन्हें थामे रखने वाले अधिकांश सिपाही ऐसे हैं, जिन्होंने कभी इन हथियारों काे चलाया तक नहीं है। कमोबेश अधिकारियों के सालाना निरीक्षण में कई बार थानेदार व दरोगा तक हथियारों का संचालन करके नहीं दिखा पाते।
अब बीटवार प्रशिक्षित होंगे पुलिसकर्मी, बनेगी क्यूआरटी
पुलिसकर्मियों के हथियार प्रशिक्षण को लेकर अब बीटवार नई व्यवस्था रेंज स्तर पर बनाई गई है। जिसमें बीटवार सिपाहियों को एक निर्धारित समय के लिए पुलिस लाइन बुलाया जाएगा। इनकी एक क्यूआरटी बनेगी। यह क्यूआरटी हथियार संचालन, रखरखाव से लेकर बीट के कामकाज को बारीकी से सीखेगी। अच्छा काम करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।
आईजी शलभ माथुर ने चारों जिलों के एसएसपी को निर्देशित किया है। जिसमें तय किया है कि सभी थानों की एक बीटवार लिस्ट बनाकर पुलिस लाइन में क्यूआरटी बनाई जाएगी। इसके लिए एक निर्धारित समय तय होगा। इस क्यूआरटी की एक निर्धारित संख्या होगी। जिसमें क्रमवार एक थाने से एक बीट कर्मचारी को संबद्ध किया जाएगा। जहां उन्हें बीट के कामकाज, हथियारों का संचालन, रखरखाव आदि का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जख्मी दरोगा से शुरू हुई घटना पर पूछताछ
इस मामले में एसपी सिटी ने अपनी विवेचना शुरू कर दी है। 19 जुलाई को डॉक्टरों की सलाह पर इंस्पेक्टर गभाना को दरोगा से बातचीत के लिए भेजा गया। हालांकि अभी दरोगा ने घटना के बाद दिए गए बयान वाली कहानी ही दोहराई है। अभी ज्यादा बोलने की मनाही है। चूंकि दो पेज का इत्तेफाकिया दर्ज किया गया है। इसलिए उसकी शब्द व शब्द तस्दीक होनी है। एसपी सिटी ने बताया कि डॉक्टरों की अनुमति पर शनिवार को फिर पूछताछ होगी और बयान दर्ज किए जा सकेंगे।
-थाने के हथियार जांच और मरम्मत को प्रतिमाह पहुंचते लाइन से ऑर्मर के पास
थानों के हथियार में बड़ी कमी होने पर उन्हें मरम्मत के लिए भेजा जाता है सीतापुर
-साल में क्रमवार रेंज खाली होने पर होता फायरिंग-रखरखाव का प्रशिक्षण
-त्रैमासिक व वार्षिक मुआयने में साफ सफाई व रखरखाव की होती जांच
मंडल में इस वर्ष फायरिंग प्रशिक्षण की स्थिति
-अलीगढ़ में महज 9 फीसदी
-एटा में फायरिंग कराई ही नहीं गई
-हाथरस में 90 फीसदी
-कासगंज में 45 फीसदी