फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Aligarh News: तलाश हुई पूरी, 12 साल बाद पुलिस को मिला ' लड्डू '

Thu, 18 Apr 2024 10:37 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

लड्डू कितना पेशेवर अपराधी है, इस बात का अंदाजा उसकी पूछताछ के बाद पुलिस को हुआ। वह पिछले एक दशक से नाम बदलकर पंजाब में रह रहा था। वहां आइसक्रीम बेचता था। बेटी से मिलने अलीगढ़ आया था, तभी दबोचा गया।
विज्ञापन
पुलिस - फोटो : प्रतीकात्मक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एसटीएफ आगरा यूनिट ने सिविल लाइंस पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में 50 हजार रुपये के इनामी अपराधी को गिरफ्तार किया है। यह अपराधी 12 वर्ष पहले पुलिस अभिरक्षा से भाग गया था। तभी से फरार था। इसके खिलाफ सिविल लाइंस में फरारी संबंधी मुकदमा दर्ज था। एसटीएफ को मिले इनपुट के बाद जब उसकी रेकी की गई तो रात में उसे किला रोड से दबोचा गया। पूछताछ के बाद 18 अप्रैल को जेल भेज दिया गया।

विज्ञापन


एसटीएफ और सिविल लाइंस पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मूल रूप से दादों के नगला उदिया का लड्डू उर्फ लड्डन पेशेवर अपराधी रहा है। उस पर अलीगढ़ के दादों व कासगंज में 16 मुकदमे दर्ज हैं। आखिरी मुकदमा 2012 का सिविल लाइंस में पुलिस अभिरक्षा से हमला करार फरारी संबंधी है।  उस पर संगीन अपराध कासगंज के सोरों व सहावर में 2003 व 2004 में हत्या युक्त लूट के दर्ज हैं। 

फरारी के बाद से लगातार टीमें उसे तलाश रही थीं। उस पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। इसी बीच एसटीएफ को इनामी अपराधियों के पीछे लगाया गया तो आगरा यूनिट ने लड्डू के विषय में इनपुट जुटाना शुरू कर दिया। इसी बीच उसके अलीगढ़ में होने की खबर मिली। खबर के आधार पर एसटीएफ यूनिट ने यहां डेरा डाल दिया और रात सिविल लाइंस पुलिस के सहयोग से किला रोड से दबोच लिया। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस राजीव कुमार के अनुसार गिरफ्तारी के बाद बृहस्पतिवार को उसे जेल भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी टीम में इंस्पेक्टर एसटीएफ हुकुम सिंह और उनके सहयोगी व इंस्पेक्टर सिविल लाइंस व उनके सहयोगी शामिल रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

पंजाब में नाम बदलकर बेच रहा था आइसक्रीम 

लड्डू कितना पेशेवर अपराधी है, इस बात का अंदाजा उसकी पूछताछ के बाद पुलिस को हुआ। वह पिछले एक दशक से नाम बदलकर पंजाब में रह रहा था। वहां आइसक्रीम बेचता था। बेटी से मिलने अलीगढ़ आया था, तभी दबोचा गया। ऐसा नहीं कि वह पहली बार आया था। इससे पहले भी आ चुका था। मगर, एसटीएफ ने इनाम होने के बाद उसकी बेटी पर होमवर्क कर लिया था। जैसे ही उसके आने की खबर मिली और टीम सक्रिय हो गई।

एसटीएफ-पुलिस को पूछताछ में उसने खुद बताया कि सहावर की हत्या युक्त लूट के मुकदमे में वह पांच वर्ष जेल रहा। उसके बाद छूटकर आने पर वह 2010 में फिर से अलीगढ़ जेल गया था। इस दौरान 2012 में वह अलीगढ़ से पेशी पर कासगंज गया था। वहां से लौटते समय पुलिसकर्मी से उसे पैदल छर्रा अड्डा से जेल ला रहे थे। तभी सिविल लाइंस क्षेत्र में कठपुला के पास भागा और रेलवे लाइन क्रॉस कर चला गया। पुलिस उसे तमाम प्रयास के बाद पकड़ न पाई। 

वह सीधे दिल्ली अपने चाचा रामनरेश के पास गया। एक माह रुका। फिर बुलंदशहर निवासी मित्र राजू के साथ बल्लभगढ़ में कुछ दिन कबाड़ी का काम किया। वहां से कुछ दिन बदायूं आकर रहा। बाद में वह दादों ककरौली के अपने साथी सतीश के साथ जालंधर पंजाब चला गया और वहां नाम बदलकर रहने लगा। वहीं अपने बच्चे बुला लिए। अब वह वहां आइसक्रीम बेचकर परिवार पाल रहा था। अपराध से तौबा कर ली थी। वर्तमान में जालंधर के सुल्तानपुर लोधी गेट थाना लोहिया खास इलाके में रह रहा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें