पुलिस व प्रत्यक्षदर्शी 2 जुलाई से ही घटना के लिए लाठी-डंडे वाले सेवादारों व सुरक्षागार्डों को जिम्मेदार मान रहे हैं। अगर वे रोकटोक, धक्का-मुक्की न करते तो शायद इतनी बड़ी घटना न होती।
सिकंदराराऊ हादसे में भीड़ को धकियाने वाले लाठी-डंडे लिए सेवादारों और वर्दीधारी सुरक्षागार्डों को चिह्नित करने व तलाशने का काम भी पुलिस ने शुरू कर दिया है। इनमें से अधिकांश लोग एनसीआर व उसके आसपास के जिलों के बताए जा रहे हैं। इनकी पहचान और तलाश के काम में भी पुलिस टीमों को लगाया गया है।
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यह बात तो साफ है कि पुलिस व प्रत्यक्षदर्शी 2 जुलाई से ही घटना के लिए लाठी-डंडे वाले सेवादारों व सुरक्षागार्डों को जिम्मेदार मान रहे हैं। अगर वे रोकटोक न करते, धक्का मुक्की न करते तो शायद इतनी बड़ी घटना न होती। इसके बाद फिर घटना को दबाने की कोशिश की। अगर आसपास के ग्रामीण न आते और पुलिस प्रशासन को न बुलाते तो बहुत देर होती। मृतक संख्या और अधिक होती। पुलिस व ग्रामीणों के आते ही यह डंडेधारी सेवादार व विशेष वर्दीधारी कमांडो व सुरक्षाकर्मी गायब हो गए।
मुकदमे में भी इनकी वजह से ही घटना होने का उल्लेख है। इसके बाद से ही ये डंडे वाले सेवादार और सुरक्षागार्डों की तलाश के काम पर पुलिस की एक टीम को लगाया गया है। इनमें से अधिकांश दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा व आसपास के बताए गए हैं। इनकी तलाश में भी पुलिस की टीमें रवाना की जा रही हैं। प्रयास है कि जल्द से जल्द कुछ लोगों की गिरफ्तारी हो सके।