महान फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता मनोज कुमार का अलीगढ़ के गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज से गहरा नाता रहा। नीरज के गीतों से प्रभावित होकर मनोज कुमार ने सन 1968 में उन्हें मुंबई में अपनी फिल्म पहचान के लिए गीत लिखने के लिए बुलवाया। इसी फिल्म में नीरज का लिखा गीत पैसे की पहचान यहां, को उन पर ही फिल्माया गया।
अलीगढ़ में मोहल्ला जनकपुरी में रहने वाले नीरज मंच के अलावा फिल्मों में भी बेहद सक्रिय रहे। नीरज के पुत्र मिलन प्रभात गुंजन ने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले तक पापा (नीरज) की अक्सर मनोज कुमार से फोन पर बात हो जाया करती थी।
फिल्म पहचान से जुड़े गीतों का जिक्र करते हुए मिलन प्रभात गुंजन कहते हैं कि पापा डीएस कॉलेज में अध्यापक थे। मनोज कुमार ने पापा को मुंबई में हुए एक कवि सम्मेलन में गीत पढ़ते हुए देखा और सुना। वह उनके गीत में किए गए अलंकारिक प्रयोग और उसी शृंगार शैली से बहुत प्रभावित हुए। यहीं से दोनों का साथ हुआ जो पापा के अंतिम समय तक रहा।
फिल्म पहचान के बाद मनोज कुमार के साथ नीरज की एक और फिल्म मेरा नाम जोकर रही, जिसमें राजकपूर के लिए नीरज ने एक कालजयी गीत ए भाई जरा देख के चलो, लिखा। यह गीत जीवन दर्शन पर आधारित है और आज भी लोकप्रिय है।
पहचान में भिखारी की भूमिका में नजर आए थे नीरज
फिल्म पहचान में नीरज ने सड़क पर गाना गाकर गुजर बसर करने वाले की भूमिका अदा की। पूरा गाना नीरज के ऊपर फिल्माया गया था। उस गीत के बोल फिल्म के नायक की मनोदशा को पर्दे पर बयां कर रहे थे।