अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को छात्र नेताओं ने उम्मीदों पर खरा न उतरने वाला बताया है। जबकि एएमयू टीचर्स एसोसिएशन के सचिव ने प्रधानमंत्री के संबोधन को उत्साहजनक बताया।
मोदी जी सारी दुनिया हमारे कदमों में रख दें, तब भी 2002 के जख्म नहीं भर सकते। एएमयू अल्पसंख्यक दर्जे पर जो मोदी सरकार ने कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है, उसे वापस लेकर अपनी सोच साबित करें। प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि वह एससी-एसटी वर्ग के लिए एक यूनिवर्सिटी स्थापित कराएं, जिसमें मुस्लिम व उच्च जाति के हिंदू के बच्चों के दखिले पर पाबंदी रहे। अक्सर एससी-एसटी के बच्चों को लिए लोगों में दर्द उठता है।
- आमिर मिंटोई, छात्र नेता
एएमयू के शताब्दी वर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी जी मेरी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। अलबत्ता, जो उनसे उम्मीद थी कि वह एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका वापस लेने की बात करेंगे, लेकिन ऐसी बात नहीं की। बात केवल महिलाओं के शौचालय, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की। आज यह साबित हो गया कि मोदी जी मुस्लिमों के न तो हितैषी थे, न हैं और न ही होंगे। प्रधानमंत्री के संबोधन का फायदा केवल कुलपति को पहुंचेगा।
-नदीम अंसारी, छात्रनेता
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एएमयू के शताब्दी वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल शुभकामनाएं दे गए हैं। जो उम्मीद थी, वह कुछ नहीं दिया। मुझे उम्मीद थी कि एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर जो भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है, उसे वापस लेने की बात करेंगे। मगर ऐसा नहीं किया। उम्मीद थी एक बड़ा हॉस्टल देंगे, गंगा नहर कॉलोनी की जमीन एएमयू को वापस देंगे, वह नहीं किया। जैसे उन्होंने सबका साथ, सबका विश्वास की बात की, उसमें फर्क नहीं हो।
-फरहान जुबैरी, छात्र नेता
एएमयू के शताब्दी वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन एएमयू बिरादरी के लिए उत्साहवर्धक है। उन्होंने एएमयू को मिनी इंडिया बताकर एएमयू की उपलब्धियों में एक और दस्तावेज शामिल कर दिया है। सरकार की तरफ से सहयोग का आश्वासन मिलना भी काबिले गौर है। मैंने जो प्रधानमंत्री को मांग पत्र भेजा है। उम्मीद है कि उस पर भी विचार करेंगे। सकारात्मक परिणाम की प्रतीक्षा है।
-प्रो. नजमुल इस्लाम, सचिव, अमुटा