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अलीगढ़ः मंडल की विस सीटों पर कब्जा बरकरार रखने पर पार्टी का जोर

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कौशल कुमार ओझा
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अलीगढ़ मंडल के चार जिलों (अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज) के 17 में से 16 विधान सभा क्षेत्रों पर भाजपा का कब्जा है। इन सीटों पर कब्जा बरकरार रखने एवं वोट प्रतिशत बढ़ाने पर संगठन का जोर है। बैठक में पदाधिकारियों को बूथ जीतने का मंत्र दिया गया। उनसे कहा गया कि यदि बूथ जीत लिया तो चुनाव जीत जाएंगे।
2017 के विधान सभा चुनाव में अलीगढ़ मंडल में भाजपा ने भगवा फहराया था। हालांकि, हाथरस की सादाबाद सीट पर बसपा से रामवीर उपाध्याय की जीत हुई थी। रालोद के अनिल चौधरी दूसरे स्थान पर रहे थे। वहां भाजपा सीधी टक्कर में नहीं थी। हालांकि, भाजपा के साढ़े चार साल के शासन काल में हालात काफी बदल चुके हैं। रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय एवं भाई रामेश्वर उपाध्याय भाजपा का दामन थाम चुके हैं। सीमा उपाध्याय वर्तमान में हाथरस जिला पंचायत की अध्यक्ष तो रामेश्वर उपाध्याय मुरसान ब्लॉक के प्रमुख हैं। कासगंज के अमापुर विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित भाजपा विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह लोधी की मृत्यु हो चुकी है। यह सीट अभी रिक्त है।
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आगरा रोड स्थित ग्रीन व्यू रिसोर्ट में विधान सभा संचालन समिति की बैठक में संगठन का जोर सीटों पर कब्जा बरकरार रखने और वोट बढ़ाने पर रहा। इसमें मंडल के सभी 17 विधान सभा क्षेत्रों के संचालन समिति के सदस्य पहुंचे थे। पदाधिकारियों से कहा गया कि बूथ जीतने का मतलब विधान सभा चुनाव जीतना है और विधान सभा जीतने का मतलब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से लेकर अन्य सभी नेताओं का जोर पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन पर रहा। भाजपा के टिकट पर सादाबाद से 2017 में चुनाव लड़ चुकीं प्रीति चौधरी कहती हैं कि अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार सादाबाद सीट भी भाजपा की झोली में जाएगी।
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