राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग वित्तीय वर्ष 2021-22 के भरे गए रिटर्न की स्क्रूटनी करने में जुट गया है। विभाग के पोर्टल पर आए विसंगति पूर्ण केसों को चिह्नित कर जोन के करीब 10 हजार व्यापारियों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है। एक हफ्ते बाद नोटिस पहुंचने शुरू हो जाएंगे।
विभाग के मुताबिक 30 सितंबर 2025 तक नोटिस भेजे जाएंगे। जबकि इन मामलों में ऑर्डर 30 अक्तूबर 2025 तक किए जा सकेंगे। जीएसटी रिटर्न की स्क्रूटनी में जो तथ्य पाए गए हैं उनमें जीएसटी रिटर्न में दी गई जानकारी गलत या अधूरी पाई गई है। कुछ मालों में गलत जीएसटीआईएन, गलत चालान नंबर या गलत राशि दर्शाई गई है।
इसके अलावा कुछ केसों में रिटर्न में दी गई जानकारी और अन्य दस्तावेजों में दी गई जानकारी मेल नहीं खा रही है। बिक्री और खरीद के रिकॉर्ड में भी अंतर है। रिटर्न में कर की काउंटिंग में भी गलती दिख रही है।
कुछ केसों में रिटर्न में इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत दावा करना सामने आया है। कुछ केसों में रिटर्न देर से फाइल किया है। ऐसे मामलों में ब्याज लंबित है। कुछ केसों में जीएसटी रिटर्न में गलत जीएसटी दर का उपयोग किया गया है। ऐसे सभी मामलों में अब विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है।
निल में रिटर्न भर रहे व्यापारियों की मौके पर जाकर हो रही जांच
जीएसटी विभाग के लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर स्थानीय अधिकारी ऐसे व्यापारियों का मौके पर जाकर सत्यापन कर रहे हैं जो निल में रिटर्न भर रहे हैं। इनमें कुछ व्यापारी ऐसे हैं जिन्होंने काम बंद कर दिया है और कुछ समय बाद काम शुरू करने की मंशा रखते हैं। दूसरे कुछ वह व्यापारी हैं जो 50 हजार रुपये से ऊपर का ईवे बिल प्रयोग कर रहे हैं। अगर बिल की रास्ते में जांच नहीं होती है तो उसे माल पहुंचने के बाद फाड़कर फेंक दिया जाता है। बाद में वह निल पर रिटर्न फाइल कर देते हैं।
रिटर्न भरने के बाद उसकी स्क्रूटनी की जाती है। विभाग व्यापारी को स्वयं कर निर्धारण करने का अवसर देता है। विभाग यह तो जांच करेगा ही कि जो निर्धारण व्यापारी ने किया है वह सही है या गलत है। अगर गलत है तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। व्यापारी के पास अपील का अधिकार है। - एसएस तिवारी, एडिश्नल कमिश्नर, जीएसटी