आगरा रोड स्थित लोधी विहार कॉलोनी की तंग गलियों से निकलकर एक बेटी ने अपने हौसलों के दम पर बड़ी पहचान बनाई है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद निशा ने हैंडबॉल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर यह साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान के लिए हालात नहीं, हिम्मत मायने रखती है।
छोटे से घर में रहने वाली निशा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता महेंद्र कुमार सक्सेना अंडे की ढकेल लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जरूरत पड़ने पर रिक्शा भी चलाते हैं। मां कृष्ण देवी गृहिणी हैं। तीन बहनों और एक भाई के बीच पली-बढ़ी निशा ने बचपन से ही जिम्मेदारियों को करीब से देखा। कई बार वह खुद भी पिता के साथ ढकेल पर उनका हाथ बंटाती हैं।
इन्हीं कठिन हालातों के बीच निशा ने अपने खेल को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। चिरंजीलाल बालिका इंटर कॉलेज की 12वीं की छात्रा निशा ने हैंडबॉल में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह अब तक तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। वर्ष 2023 में हरियाणा, 2024 में पंजाब और मणिपुर में आयोजित प्रतियोगिताओं में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
इसके अलावा ओपन सीनियर नेशनल में भी अपनी जगह बनाई। वर्ष 2025 में बिहार और 2026 में बरेली में आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर निशा ने अपने खेल का लोहा मनवाया है। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी कोच निति का अहम योगदान रहा है, जो उन्हें नियमित अभ्यास कराती हैं। निशा का सपना भारत के लिए खेलना और अपने परिवार के साथ-साथ देश का नाम रोशन करना।