महानगर के सिविल लाइंस क्षेत्र के 12 साल पुराने बच्चे की अपहरण के बाद हत्या के नामजद नेपाली आरोपी को अब नेपाल सरकार गिरफ्तार कर अलीगढ़ पुलिस सौंपेगी। भारत-नेपाल सरकार की प्रत्यर्पण संधि के तहत शासन से मंजूरी के बाद सिविल लाइंस पुलिस की एक टीम शनिवार रात नेपाल रवाना हो गई है।
इस नेपाली हत्यारोपी के खिलाफ हाईकोर्ट ने दिसंबर माह में गैर जमानती वारंट जारी कर दिए थे। तभी से सिविल लाइंस पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए है।
मूल रूप से नेपाल के जिला कैलाली थाना बोनिया के गांव बुटकऊआ निवासी सुरेश पुत्र किशनबहादुर और उसके गांव का प्रेम बहादुर यहां फ्रेंडस कॉलोनी सिविल लाइंस में रहते थे। फरवरी 2004 में प्रेम बहादुर के चार साल के बेटे विनोद की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई।
इस मामले में सुरेश को नामजद किया गया और पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर मंजूरगढ़ी से विनोद की लाश बरामद की थी। बाद में सुरेश जेल भेजा गया और उसके खिलाफ चार्जशीट दायर हुई। वर्ष 2009 में सत्र न्यायालय से सुरेश को साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी कर दिया गया।
इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में दोषमुक्त आदेश के खिलाफ अपील की गई। जिस पर अदालत ने सुरेश को हाजिर होने के निर्देश दिए, मगर हाजिर न होने पर उसके खिलाफ माह दिसंबर 2016 में गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।
अदालत के इस आदेश के बाद से सिविल लाइंस पुलिस उसे तलाश रही थी।
मगर उसका सुराग नहीं लगा। अधिकांश लोगों का अंदेशा था कि वह नेपाल ही चला गया होगा। ऐसे में पुलिस बिना किसी सटीक जानकारी के कहां से उसे तलाश कर लाया जाए। चूंकि भारत-नेपाल के मध्य प्रत्यर्पध संधि है, इसलिए स्थानीय पुलिस ने नेपाल दूतावास, भारत सरकार और प्रदेश सरकार में गृह विभाग को पत्राचार कर वहां जाने और गिरफ्तारी में नेपाल पुलिस की मदद दिलाने की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति दो दिन पूर्व मिल गई। इस अनुमति के मिलने के बाद सिविल लाइंस पुलिस की टीम नेपाल रवाना हुई है।
फिलहाल सुरेश के नेपाल में होने का अंदेशा है। इसलिए उसे वहां से गिरफ्तार करके लाने के लिए अनुमति मांगी गई थी। अनुमति लेकर हमारी टीम नेपाल गई है। वह टीम संबंधित जिले के जिलाधिकारी व एसएसपी को अनुमति व अदालत का वारंट देगी। फिर वहां की पुलिस संभव हुआ तो तत्काल गिरफ्तार कराकर सुरेश को हमारी टीम को सौंपेगी। या फिर मौके पर मौजूद न मिला तो बाद में उसे गिरफ्तार कर भारत भेजा जाएगा। यह टीम के नेपाल पहुंचने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सुरेश वहां है या नहीं।
- राजीव सिंह सीओ तृतीय