अगर आप ऑनलाइन खरीदारी पसंद करते हैं तो विश्वसनीय कंपनियों पर ही भरोसा करें। जहां शिकायत करने पर कम से कम आपकी गाढ़ी कमाई रिफंड हो सके। अगर आप अनजाने में किसी भी कंपनी के सस्ते उत्पाद के लालच में फंसे तो आपकी रकम डूब भी सकती है।
अलीगढ़ में ऐसी कुछ कंपनियां सक्रिय हैं, जो पैसा लेने के बाद पसंद किए गए माल की जगह बोगस आइटम, मिट्टी और कचरा भेज कर रातों रात गायब हो जाती हैं। अलीगढ़ ही नहीं देश के कई शहरों में ऐसी फ्राड कंपनियां सक्रिय हैं। यहां के लोग दूसरे शहरों में तो दूसरे शहरों के लोग यहां पर माल बेच रहे हैं। कुछ को मंगाया हुआ माल मिल जाता है तो कुछ के पार्सल में बोगस सामान या मिट्टी कचरा ही मिलता है।
खास बात ये कि इनकी शिकायत करने के बाद कंपनियों के पते पर कुछ नहीं मिलता और पीड़ित खुद को ठगा महसूस करता है। पिछले कुछ दिनों में शहर के शंकर विहार, मदार गेट और रघुवीर पुरी में भी लोगों से इस प्रकार की ठगी के मामले प्रकाश में आ चुके हैं।
पोस्ट आफिस से लेकर रेलवे के आरएमएस कार्यालय तक हर रोज से डेढ़ हजार पार्सल का कारोबार हो रहा है। ये संख्या हर महीने बढ़ती जा रही है। इसमें बाहर से आने वाले और यहां से जाने वाले दोनों तरह के पार्सल शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले पार्सलों की जांच कब और कैसे होती है..? सीनियर पोस्ट मास्टर भी इस बारे में कुछ नहीं बता सके। रेलवे सुरक्षा के नजरिये से देखें तो भी इन पार्सलों की कम से कम रेंडम जांच होनी चाहिए।
ऐसे होता है फ्राड..?
इंटरनेट सिस्टम, मोबाइल, कैमरा और कुछ डिवाइसों को फर्जी आईडी पर लगाना। इसी सिस्टम से अलीगढ़ से दूसरे राज्यों के कुुछ चुनिंदा शहरों के कस्टमर को टेलीफोन, ईमेल या व्हाटस एप कालिंग से कुछ उत्पादों को सस्ते रेट पर बेचा जाता है।
इन ग्राहकों की लिस्ट अलग-अलग माध्यमों से ली जाती है। बेचने के बाद उन उत्पादों का भुगतान बैंक खातों में लिया जाता है। कुछ लोगों को तो दिखाए और बताए गए माल को हकीकत में भेजा जाता है, बल्कि कुछ लोगों को कुछ ओर ही भेजा जाता है। पार्सल में मंगवाया गया सामान न मिलने पर पीड़ित शिकायत करता है तो वह पुलिस की जांच में उलझ जाता है।
हाथरस में डेढ़ साल पहले हुआ था खुलासा
तकरीबन पौने दो साल पहले हाथरस जिले के हाथरस गेट थाने की लेबर कालोनी पर पुलिस ने छापा मार कर ऐसी कई कंपनियों को बेनकाब किया था। यहां से लाखों रुपये का माल, टेलीफोन नंबर, इंटरनेट सेट, पार्सल और दूसरे सामान मिले थे, जिनको पुलिस ने जब्त कर लिया था। अभी तक इस मामले की सुनवाई जारी है। पुलिस सूत्रों की मानें तो वहां पर कार्रवाई होने के बाद कुछ कंपनियों ने अलीगढ़ में अपना ठिकाना बना लिया।
मैं पिछले एक महीने से गाजियाबाद ट्रेनिंग पर आया हूं। मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकता हूं। अगर कोई शिकायत मिलती है तो उस पर कार्रवाई होती है। विभाग नियमानुसार जांच करता है।
-आरके तिवारी, सीनियर पोस्ट मास्टर