अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चल रहे सीएए, एनआरसी के विरोध प्रदर्शन को शनिवार को दो महीने पूरे हो गए। इस अवसर पर धरने पर पहुंची मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना ने कहा कि हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। पहले हम मुसलमान हैं और उसके बाद कुछ और हैं। हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुंह दिखाने लायक न रह जाएं।
कैंपस में विरोध के दो महीने पूरे होने पर एक मार्च निकाला गया। सुमैया राना ने लखनऊ पुलिस पर आंदोलन कर रहे लोगों के साथ अभद्रता करने और उनकी अभिव्यक्ति को दबाने का आरोप लगाया। सुमैया राना ने कहा कि लखनऊ में चल रहे धरना प्रदर्शन में हमारे भाई धरना स्थल पर बैठी महिलाओं के लिए कंबल लाते हैं। बच्चों के लिए दूध लाते हैं, लेकिन लखनऊ के डीएसपी के इशारे पर कंबल छीन लिए जाते हैं।
ऐसे छीने जाते हैं, जैसे कोई चोर सामान छीन कर भाग रहा हो। अभी तक यह पता था कि मुसलमानों की औरतें घरों में रहती हैं और घरेलू कामों में ही उलझी रहती हैं, लेकिन आज महिलाओं ने दिखा दिया है कि वह अपने आंचल को परचम भी बना लेना जानती हैं। आज जो हिंदुस्तान में हालात हैं, उसमें सभी धर्मों के लोग परेशान हैं।
इसके अलावा धरना स्थल पर एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी भी पहुंचे। उन्होंने एलान किया कि देश में सीएए को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। जब तक सरकार इसको वापस नहीं ले लेती तब तक इसका विरोध जारी रहेगा। इससे पहले सभी छात्र-छात्राएं चुंगी गेट पर इकट्ठा हुए और यहां से बाब ए सैयद तक मार्च निकाला गया।
सुमैया राना ने कहा कि लखनऊ में हम लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन आयोजित किया था, जिसमें सिर्फ महिलाएं थीं। लेकिन उन लोगों ने (प्रशासन ने) वाश रूम बंद करा दिए। खाना पानी बंद करा दिया। इन्होंने कानून को ताक पर रख दिया है। अब जो हालात हैं उसमें घुटन महसूस होती है। पीड़ित लोगों में दलित भी हैं। ईसाई भी हैं। सिख भी हैं।