अलीगढ़ शहर के सराय हकीम क्षेत्र के निवासी मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल्ला नदवी ने शुक्रवार को कहा कि जिस तरह से कांवड़ यात्रा और धार्मिक यात्राओं के लिए ट्रैफिक रोका जाता है, उसी तरह से आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज के लिए भी सड़क पर यातायात को एक से डेढ़ घंटे के लिए रोका जाए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर सुर्खियां बना तो शाम को वह इससे पलट गए।
एक दूसरा वीडियो जारी कर उन्होंने कहा कि ईद की नमाज सड़क पर न पढ़ें, मस्जिद के अंदर ही पढ़ें। साथ ही कुर्बानी के अवशेष भी सही जगह निस्तारित करें। इससे पहले शुक्रवार दोपहर मुफ्ती अब्दुल्ला नदवी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का उल्लेख करते हुए कहा था कि अगर सरकार सबको समान दृष्टिकोण से देखती है, तो सहूलियतें भी समान मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, हम कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं का समर्थन करते हैं। श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए रोड ब्लॉक करना अच्छी बात है, लेकिन जब बात मुसलमानों की आती है, तो सड़क पर नमाज की अनुमति नहीं मिलती।
मुफ्ती का कहना था कि जब अन्य धर्मों के त्योहारों पर मार्ग परिवर्तित या अवरुद्ध किए जा सकते हैं, तो साल में दो बार होने वाली ईद की नमाज के लिए भी डेढ़ घंटे की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि वर्तमान में रेलवे रोड पर निर्माण कार्य चलने के कारण सारा ट्रैफिक सराय हकीम रोड से गुजर रहा है। ऐसे में ईदगाह वाले रास्ते पर नमाज के दौरान यातायात रोकना जरूरी है।
हमारी पीस कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। इसमें अधिकारियों ने हमें बताया इस प्रकार की मांग राज्य सरकार के नियमों के दायरे में नहीं है। इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद प्रशासन की बात को स्वीकार किया गया और मांग वापस ले ली।- मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल्ला नदवी