मंडल के सातों डिपो में 150 से अधिक रोडवेज बस खराब पड़ी हुई हैं। तमाम समस्याओं के चलते ये बसें डिपो में ही खड़ी हुई हैं। टायर से लेकर बैटरी या मेकेनिकल खराबी के चलते इन बसों को सड़कों पर दौड़ाया नहीं जा सकता है। वहीं 90 से अधिक कंडम बसों से यात्रियों को सफर कराने के लिए परिवहन निगम मजबूर है।
अलीगढ़ मंडल में सात डिपो हैं। हाथरस डिपो में 77, अलीगढ़ में 115, बुद्ध विहार में 133, नरौरा में 49, कासगंज में 86, एटा में 150 और अतरौली में 48 रोडवेज बस हैं। कुल 658 बसें यात्रियों के सफर के लिए लगी हैं। इनमें से 90 बसें अनुबंधित वाली हैं। इन्हीं बसों में 150 से अधिक बसें विभिन्न डिपो पर विभिन्न खामियों के चलते खड़ी हुई हैं। वहीं 90 बस ऐसी भी हैं, जो कंडम की सीमा को पार कर चुकी हैं। इसके बावजूद सड़कों पर दौड़ रही हैं।
बता दें कि शासन ने दस साल और 11 लाख किलोमीटर का मानक कंडम के लिए माना है। मंडल में 90 बसें ऐसी हैं, जो इन दोनों शर्तों को पूरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद यात्रियों को ढो रही हैं। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हो जाता, तब तक यह बसें दौड़ती रहेंगी। इसके अलावा 150 से अधिक बसें विभिन्न कमियों के चलते खड़ी हैं। बैटरी, टायर, इंजन में खराबी या अन्य तकनीकी कमी है, लेकिन इसको दुरुस्त करने के लिए कोई सामान नहीं आ रहा है।
सामान के अभाव में वर्कशॉप पर रोडवेज बस खड़ी हैं, सामान आते ही इन्हें दुरुस्त करवा लिया जाएगा। कंडम बसों की सूची तैयार कराएंगे। अगर ये बसें चलने की हालत में नहीं होंगी तो इनकी नीलामी कराई जाएगी। इसके लिए उच्चाधिकारियों से निर्देश लेकर कार्यवाही करेंगे। - मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक।