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'प्रवासी कोरोना' बना गले की फांस

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कोरोना महामारी में एक ओर प्रवासी श्रमिकों की दर्द भरी दास्तां सरकार, अधिकारी, आम जनता को बैचेन कर रही है। दूसरी ओर इनके जरिये गांव-देहात में पहुंच रहा कोरोना वायरस गले की फांस बन गया है। जिला प्रशासन इस फांस को निकाल कोरोना चेन को तोड़ने के लिए जतन कर रहा है। मगर, पिछले एक सप्ताह में जिले में 16 श्रमिक व उनके कनेक्शन के संक्रमित पाए गए हैं। अब तक जनपद में मिले 128 संक्त्रस्मितों में से रिकार्ड 16 संक्रमित प्रवासी श्रमिक और उनके बच्चे हैं। इन्होंने गांव की चैन सुकुन भरी जिंदगी में इस बीमारी की भय भर दिया है।
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रविवार को तीन कोरोना संक्रमित केसों में अतरौली का 27 साल का कैंसर पीड़ित व्यक्ति, गोंडा थाना क्षेत्र के गांव कैथवारी एक साल की बालिका भी कोरोना संक्रमित मिली। बालिका का तीन साल का भाई और चाचा शनिवार को ही संक्र्रमित पाए गए थे। जिला प्रशासन ने निगरानी समिति से लेकर, ग्राम प्रधानों को एक्टिव पहरेदार बनान तक का प्लान तैयार कर लिया है। इस प्लान के तहत काम हो रहा है। इस प्लान से कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले प्रवासियों के गांव के अन्य लोगों को तो बचाने की कोशिश पर काम हो रहा है। मगर, गुजरात, महाराष्ट्र से सीधे आने वाले श्रमिक जो कि जांच में संक्रमित पाए जा रहे हैं। उनके लिए कोई प्लान तैयार नहीं किया जा रहा है।
मई के प्रथम सप्ताह में जिलाधिकारी ने अपने विवेक से इन श्रमिकों के जिले में आने के बाद सात दिन तक शेल्टर होम में ही क्वारंटीन करने का निर्णय लिया था। यह प्रयास अच्छा था। मगर, शासन के निर्देश पर इसको बंद करना पड़ा। इसके बाद से न तो शासन और न ही जिला प्रशासन की ओर से इस तरह का कोई प्लान तैयार किया गया है, जिससे की इनको वायरस से बचाया जा सके या फिर इनको परिवार वालों/गांव वालों से कुछ समय के लिए दूर रखा जा सके।
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