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डायबिटीज, बीपी, हार्ट और सांस रोगियों पर कोरोना मार रहा झपट्टा

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प्रोफ़ेसर मोहम्मद शमीम। - फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
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यदि आप डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, सांस और दिल सहित दूसरी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि अलीगढ़ में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 11 लोगों की मौत हुई है, इनमें से अधिकतर इन बीमारियों से ग्रसित थे। कोरोना संक्रमित इन मरीजों की मौत का कारण एआरडीएस (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिजीज सिंड्रोम) स्टेज में पहुंच जाना भी है। इस स्टेज में 90 से 95 प्रतिशत मौत हो रही है। अमेरिका में भी इसी स्टेज में सबसे अधिक मौत हो रही हैं।
यदि एआरडीएस स्टेज के पहले मरीज अस्पताल पहुंच जाए तो वह काफी हद तक सुरक्षित है। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रो. मोहम्मद शमीम का कहना है कि बुखार आने पर इन बीमारियों से ग्रसित लोगों को तुरंत जांच करवानी चाहिए, क्योंकि इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है।
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कोरोना वायरस की चपेट में आकर 13 लोग अब तक जान गंवा चुके हैं। इसमें से जयगंज की महिला और अवंतिका फेस वन के दवा कारोबारी की मौत दिल्ली में उपचार के दौरान हुई थी। अलीगढ़ में 11 लोगों की मौत हुई है। मानिक चौक के स्क्रैप कारोबारी व गंभीरपुरा के हार्डवेयर कारोबारी को जेएन मेडिकल कॉलेज में ठीक से उपचार भी नसीब नहीं हो सका।
कुछ लोगों की मौत उपचार के दौरान हुई और मृत्यु के बाद कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के प्रो. मोहम्मद शमीम का कहना है कि मौत के पीछे अन्य बीमारी भी जिम्मेदार हैं। शनिवार को जान गंवाने वाले मानिक चौक के 45 वर्षीय व्यक्ति को छोड़ दें तो अधिकतर डायबिटीज, बीपी, हार्ट, सांस आदि बीमारियों से पीड़ित थे यानी वे वास्तविक कोविड-19 मरीज नहीं थे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 में मौत का एक कारण एआरडीएस स्टेज में आना भी है।
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बुखार होने पर टेस्ट कराने में देरी नहीं करें। शुरूआती दौर में कोरोना से संक्रमित मरीज आते हैं तो उनके उपचार में कोई परेशानी नहीं है। खतरा भी कम है। एआरडीएस स्टेज में आने के बाद स्थिति संभालना मुश्किल है। डायबिटीज, बीपी एवं हार्ट आदि के रोगी विशेष सतर्कता बरतें।
- प्रो. मोहम्मद शमीम, टीबी एंड चेस्ट रोग विशेषज्ञ, जेएन मेडिकल कॉलेज
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