इसी क्रम में 14 अक्तूबर को एफआईआर लेखक शिल्पी पाल व डॉ आकांक्षा यादव की गवाही, 15 अक्तूबर को मुल्जिम के बयान, 17 अक्तूबर को सफाई साक्ष्य, 19 अक्तूबर को बहस पूरी हुई। इसके बाद साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर शुक्रवार को अदालत ने पुजारी को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई है।
इस संबंध में संयुक्त निदेशक अभियोजन संतोष कुमार उपाध्याय के अनुसार मिशन शक्ति अभियान के तहत यह नए कानून में प्रदेश की दूसरी सजा है। पुलिस व अभियोजन द्वारा पत्रावली को चिह्नित करके प्रभावी पैरवी कराई गई है। इससे पहले प्रदेश की पहली सजा 19 अक्तूबर को सुनाई गई थी। जिसमें अतरौली क्षेत्र में एक मानसिक रूप से कमजोर किशोरी से दुष्कर्म के मामले में 29 दिन में इसी अदालत ने दोषी को 20 साल की सजा सुनाई थी।