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नहीं रहे अलीगढ़ के अंतिम स्वतंत्रता सेनानी आफताब अहमद खां, अंग्रेजों को चकमा देने में थे माहिर

Thu, 19 Dec 2019 10:05 AM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़ 
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अंतिम सलामी देते पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आफताब अहमद खां का बुधवार को अलीगढ़ के अतरौली में इंतकाल हो गया। पैर में तकलीफ के चलते वह कई दिन से जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे। बुधवार सुबह 7:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। पूरे राजकीय सम्मान के साथ अतरौली के पुराना रामघाट रोड स्थित कब्रिस्तान में उनके शव को सुपुर्द ए खाक किया गया। 

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पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह और पूर्व विधायक वीरेश यादव ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। नायब तहसीलदार दिनेश शर्मा, एसएसआई रितेश कुमार, एसआई रवेंद्र सिंह के साथ पुलिस टीम ने उनके शव पर तिरंगा ओढ़ाया और सलामी दी गई।

कौन थे आफताब अहमद खां?

अतरौली कस्बे के मोहल्ला चौधरियान निवासी आफताब अहमद खां पुत्र शेर मोहम्मद खान का जन्म 10 जनवरी, 1925 को हुआ था। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 10 साल के थे तभी अंग्रेज सैनिकों ने उनका घर ढहा दिया था। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर दी थी। 

आफताब अहमद खां (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद वह आजादी के लिए गांधी जी के आंदोलन से जुड़ गए। उन्होंने आगरा में गधापाड़ा का रेलवे पुल बम से उड़ाया था। सेठ अचल सिंह व ज्वाला प्रसाद जुज्ञासी के साथ वह आगरा जेल में बंदी रक्षक के पद पर भी रहे। देशवासियों को जेल में यातनाओं का उन्होंने विरोध किया तो तबादला अलीगढ़ कर दिया गया। 

जेल में ही एक बार अंग्रेज सिपाहियों ने उनकी हाथ की हड्डी व पसली तक तोड़ दीं, फिर भी उनका आजादी का जुनून कम नहीं हुआ। जेल में बंदियों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजी सिपाहियों को पीटा और भाग गए। इसके बाद उन्होंने दीनापुर में पूर्व विधायक स्व. बाबू सिंह यादव के यहां फरारी काटी। 
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मौसेरे भाई के इंतकाल पर पूर्व विधायक के छलके आंसू

आफताब अहमद खां अतरौली के पूर्व विधायक रहे डॉ. अनवार खां के मौसेरे भाई थे। पूर्व विधायक ने जब उनके इंतकाल का समाचार सुना तो उनके भी आंसू छलक पड़े। 

कासिफ अमर उजाला आया क्या...
आफताब अहमद खां को अमर उजाला से बेहद लगाव था। वह अमर उजाला समाचार पत्र ही पढ़ने के शौकीन थे। उनके नाती कासिफ चौधरी (प्रधानाचार्य) बताते हैं कि सुबह उठते ही दादा उनसे अमर उजाला मांगते थे। अमर उजाला पढ़ने के बाद ही दूसरे अखबारों की सुर्खियों पर नजर डालते थे। 

तीन बेटों का भरा पूरा परिवार
आफताब अहमद खां का तीन बेटों का भरा पूरा परिवार है। बड़े बेटे जमशेद खां मुंबई में कारोबार करते हैं। मुख्त्यार सलीम खेती व मुजम्मिल अहमद यूपी पुलिस में हैं। दो बेटी जैनब व जुबैदा हैं। सभी की शादी हो गई। जैनब का कुछ समय पहले इंतकाल हो गया। नाती मुरसलिम भी यूपी पुलिस में हैं।
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