विधानसभा चुनाव 2022 में कोल विधानसभा सीट सबसे चर्चित रहने वाली है, क्योंकि यहां पर हर पार्टी में दावेदारों की लाइन लंबी है। कमोबेश सभी पार्टियों में पांच-पांच मजबूत दावेदार हैं। अब टिकट किस-किस को मिलेगी? इस पर बहस जारी है। इस सीट के अतीत पर नजर डालें तो भाजपा सर्वाधिक सात, कांग्रेस चार, बसपा दो और सपा केवल एक बार चुनाव जीती है। जनसंघ, रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया, जेएनपी भी एक-एक बार यहां से विजयी रही। वर्तमान में ये सीट भाजपा के पास है, और अनिल पाराशर इस सीट से विधायक हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) इस विधानसभा की विश्वस्तरीय पहचान है। मिश्रित आबादी वाली इस विधानसभा में हिंदू, मुसलमान, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय के लोग रहते हैं। सर्वाधिक आबादी हिंदुओं और मुसलमानों की हैं। कलेक्ट्रेट, कमिश्नरी, पुलिस लाइन, दीवानी कचहरी, जेल, कारखाने, प्रमुख बाजार, प्रशासनिक कार्यालय सब इसी विधानसभा क्षेत्र में हैं। रामघाट रोड, अनूपशहर रोड, एटा चुंगी बाईपास रोड, ओजोन सिटी-सांगवान सिटी रोड पर शहर तेजी से विकास कर रहा है।
वर्ष 2017 के चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन हठबंधन बना गया था। सपा से अज्जू इस्हाक और कांग्रेस से विवेक बंसल चुनाव लड़े। दोनों का टिकट आखिरी दिन तक चर्चा में रहा। जमीरउल्लाह सपा के निवर्तमान विधायक थे, लेकिन टिकट कटने के बाद बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे। चुनाव में उनको 13 हजार वोट मिले और वह चुनाव हार गए। इसके अलावा, सपा के ठा. राकेश सिंह, वीरेश यादव और जफर आलम भी चुनाव हार गए। चार सीटों वाली सपा अलीगढ़ में शून्य पर आ गई। हालांकि, अब जमीरउल्लाह सपा में वापस आ गए हैं।
कोल विधानसभा सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। पार्टी यहां से सात बार जीती है। लेकिन वर्ष 1996 में रामसखी कठेरिया के विधायक बनने के बाद तीन चुनाव भाजपा हार गई। 21 वर्ष बाद वर्ष 2017 में भाजपा से अनिल पाराशर यहां से जीते। अब पार्टी किसी भी कीमत पर इस सीट को गंवाना नहीं चाहती है।
इस सीट पर भाजपा के किशन लाल दिलेर सर्वाधिक छह बार विधायक रहे हैं। वह चार बार भाजपा और एक-एक बार जनसंघ और जेएनपी से विधायक चुने गए। वर्ष 1977 में दिलेर जेएनपी से जीते थे। यही पार्टी जनसंघ पार्टी, भारतीय क्रांति पार्टी और बाद में लोकदल बनी। भाजपा के टिकट पर रामसखी कठेरिया और अनिल पाराशर एक-एक बार विधायक चुने गए हैं। किशन लाल दिलेर के पुत्र राजवीर दिलेर इस वक्त हाथरस से भाजपा के सांसद एवं इगलास के पूर्व भाजपा विधायक रहे हैं। दिलेर के हाथरस सांसद बनने के बाद खाली हुई इगलास विधानसभा सीट पर वर्ष 2019 में उपचुनाव हुए और राजकुमार सहयोगी भाजपा के विधायक बने। इगलास विधानसभा के उपचुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रचार करने आए थे और उन्होंने राजा महेंद्र प्रताप सिंह विवि की स्थापना की घोषणा की थी। इस विवि का बीती 14 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया था। बहरहाल, इस सीट पर अभी से भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस में टिकट को लेकर उठापटक शुरू हो गई है। इस सीट पर भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा के बीच मुकाबला होगा। इसलिए सभी की नजरें इन दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों पर टिक गई हैं।
1957 में कांग्रेस से मोहनलाल गौतम व रामप्रसाद देशमुख
1962 में रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया से भूप सिंह
1967 में जनसंघ से किशन लाल दिलेर
1969 में बीकेडी से पूरन चंद्र
1974 में कांग्रेस से पूरन चंद्र
1977 में जेएनपी से किशन लाल दिलेर
1980 में कांग्रेस से पूरन चंद्र
1985 में भाजपा से किशन लाल दिलेर
1989 में कांग्रेस से रामप्रसाद देशमुख
1991 में भाजपा से किशन लाल दिलेर
1993 में भाजपा से किशन लाल दिलेर
1996 में भाजपा से रामसखी कठेरिया
2002 में बसपा से चौ. महेंद्र सिंह
2007 में बसपा से चौ. महेंद्र सिंह
2012 में सपा से हाजी जमीरउल्लाह
2017 में भाजपा से अनिल पाराशर