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‘जमीन जल रही है फिर भी चल रहा हूं मैं’

Sun, 07 Feb 2016 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अलीगढ़।
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कवि किस प्रकार अपने शब्दों को विसंगतियों और विरोधाभासों के लिए एक हथियार बनाता है? इस बात का अंदाजा उन श्रोताओं को जरूर हुआ होगा जो शनिवार की रात नुमाइश की कृष्णांजलि नाट्यशाला में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साक्षी थे।
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 इसके साथ ऋंगार के झोंके और हास्य के हिचकोलों ने भी सुनने वालों को अहसास कर दिया कि कविता में आत्मा के भीतर उतरने की क्षमता है। प्रसिद्ध गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन का उद्घाटन जनपद न्यायाधीश यूसी श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जवलित करके किया।

गोपाल दास नीरज ने अपने चिर परिचित अंदाज में गजल पढ़ी ‘अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए, मेरे दुुख दर्द का हो तुझ पे असर कुछ ऐसा, मैं रहूं भूखा तो तुझ से भी न खाया जाए’।
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प्रख्यात गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने जब कवितापाठ किया तो श्रोता बार बार उनसे सुनाने का ही आग्रह करने लगे।

 उन्होंने कहा कि ‘जमीन जल रही है फिर भी चल रहा हूं मैं, खिंजा का वक्त है और फूल फल रहा हूं मैं’। दिल्ली से आए अरुण जैमिनी ने कहा कि ‘इंटरव्यूह देेने पहुुंचा, हरियाणे का युवा बेरोजगार, एक पोस्ट के लिए आए ते अस्सी उम्मीदवार’। अलवर से आए विनीत चौहान ने श्रोताओं को वीर रस से  सरावोर कर दिया।

उन्होंने पठानकोट हमले की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘आतंकी कैसे घुस आए परदेसी दरबारों से, लगता है कुुछ चूक हुई है अपने पहरेदारों से’। इसके अलावा सुरेंद्र सुकुमार, दिल्ली से आईं सरिता शर्मा, पालना से कविता किरन, शिव कुमार अर्चन, शशांक प्रभाकर, पूनम वर्मा, बनज कुमार बनज, अशोक अंजुम, अरुणा चौहान आदि ने भी कविता पाठ किया। इस मौके पर एडीएम सिटी अवधेश कुमार तिवारी, कार्यक्रम संयोजक राकेश सक्सेना, उप नगर आयुक्त मसूद अहमद आदि थे।
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