जबरन शादी, मारपीट और फिर मोबाइल से गुहार
पुलिस के अनुसार विनोद ने बच्ची की जबरन अपने बेटे से शादी करा दी। आरोप है कि घर में उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की जाती थी। इससे परेशान बच्ची ने मौका देखकर घर की बहू का मोबाइल उठाया और उसका पैटर्न लॉक खोल लिया। इसके बाद उसने डायल 112 पर फोन कर अपनी लोकेशन और बंधक बनाए जाने की सूचना दी। बीते सात अगस्त को कॉल मिलते ही सीओ खैर अभिषेक पटेल और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट सक्रिय हुई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को मुक्त कराया। पूछताछ और जांच में दो अन्य नाबालिग बच्चियों के भी गिरोह के संपर्क में होने की जानकारी मिली। दोनों को भी पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
तीन खरीदार भी पकड़े गए
पुलिस ने कथित सरगना बबिता उर्फ चाची निवासी प्रयागराज और उसके सहयोगी सुखाराम उर्फ महावीर निवासी गोंडा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार सुखाराम मूल रूप से राजस्थान के डीग का रहने वाला है और पहचान छिपाकर यहां रह रहा था। इसके अलावा मौर गांव निवासी विनोद जाट, गोंडा निवासी बबलू और ओमपाल सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि इन तीनों ने शादी के नाम पर नाबालिग बच्चियों को खरीदा था।
अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल
एसपी ग्रामीण मनीष कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी, नाबालिग से दुष्कर्म, पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब बच्चियों के मूल परिजनों का पता लगाने के साथ यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितनी बच्चियों को अपना शिकार बनाया। बहरहाल, एक बच्ची की हिम्मत ने सिर्फ तीन मासूमों को आजाद नहीं कराया, बल्कि पुलिस के सामने उस नेटवर्क की पहली बड़ी कड़ी भी खोल दी, जिसकी बाकी कड़ियां अब तलाशी जा रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल...अब तक कितनी बच्चियां बनीं शिकार?
पुलिस की जांच अब सिर्फ गिरफ्तार पांच आरोपियों तक सीमित नहीं है। यह पता लगाया जा रहा है कि बबीता और सुखाराम का नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला था, अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ या एनसीआर लाया गया और कितनों का कथित सौदा किया गया। एक बच्ची के हाथ लगा मोबाइल इस नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हुआ। उसकी एक कॉल ने वह दरवाजा खोल दिया, जिसके पीछे पुलिस को बच्चियों की कथित खरीद-फरोख्त का पूरा नेटवर्क दिखाई दिया।