रंगों के त्योहार होली में अब एक सप्ताह शेष है। थोक से लेकर फुटकर बाजार में भी रौनक छाने लगी है। लेकिन इस साल चाइनीज उत्पादों का रंग उड़ा हुआ है। दरअसल, लॉकडाउन से पहले रंगों व पिचकारी के बाजार पर चीन का करीब 60 फीसदी कब्जा था। लेकिन कोरोना काल के चलते लोगों ने चीनी उत्पादों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी, इसका असर यह हुआ कि चीनी उत्पाद 20 फीसदी में सिमट गए हैं, जबकि भारतीय उत्पादों की मांग अच्छी खासी है, जिसमें कलर स्प्रे, मुखौटे, रंग, गुलाल, टोपी, रंग बिरंगे बाल आदि आइटम बाजार में बिक रहे हैं। सस्ते होने के कारण भी लोग इन्हें ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
होली पर बाजार सजने लगे हैं। जिले की बात करें तो यहां पर रंगों व पिचकारी आदि का लगभग पांच करोड़ का व्यापार है। इस साल मेड इन इंडिया आइटमों की बाजार में धूम है। भारत में बने उत्पाद चीन माल के मुकाबले काफी सस्ते हैं। लोग इन्हें खरीदने से पहले उसका लेबल भी चेक कर रहे हैं। कुल मिलाकर दुकानदार से ग्राहक तक मेड इन इंडिया माल को ज्यादा तर्ज दे रहे हैं। सब्जी मंडी बाजार के थोक विक्रेता संजय बंसल के मुताबिक इस साल चीनी माल की बाजार में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। लेकिन माल महंगा होने की वजह से ग्राहक उसे खरीद नहीं रहे हैं। कोरोना के चलते चाइनीज माल की बाजार में मांग कम हुई है।
चीन के गिने चुने आइटम बाजार में
कोरोना काल में चीन के माल की मांग भारतीय बाजार में कम हुई थी, सरकार ने ड्यूटी भी बढ़ा दी है। जिसके कारण थोक बाजार में मांग कम हो गई है। थोक कारोबारी सोमांक वार्ष्णेय ने बताया कि दिल्ली स्थित कारखानों में चीन की तर्ज पर माल तैयार किया जा रहा है। पहले कई प्रकार की पिचकारी चीन से आती थीं। लेकिन इस साल बाजार में चाइनीज पिचकारी न के बराबर हैं। कुछ ही आइटम जैसे हेयर कैप, मुखौटे, कलर स्प्रे, जंबो गुब्बारे ही चीन से आ रहे हैं।
चीनी माल महंगा, इंडियन सस्ता
थोक कारोबारी सोमांक वार्ष्णेय ने बताया कि चीनी माल मंहगा है, इसलिए ग्राहक उसे कम खरीद रहे है। लोगों में धारणा है कि कोरोना की उत्पत्ति चीन से हुई थी। इसके चलते लोग थोड़ा रहे हैं। थोक बाजार में चाइनीज हेयर कैप 84 रुपये दर्जन में बिक रहा है। मुखौटा 3 रुपये से 30 रुपये पीस बिक रहा है। कलर स्प्रे 26 रुपये से 60 रुपये पीस है। चीनी झाड़ू मैजिक गुब्बारे 27 रुपये पीस से 60 रुपये पीस के दाम हैं। मेड इन इंडिया उत्पादों के रेट इससे आधे हैं।