जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निधि गोस्वामी के अनुसार, प्रशासनिक दस्तावेजों और एएमयू के सर्वे आंकड़ों में बड़ा अंतर है। अधिकांश संपत्तियां कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हैं। इस पूरी विसंगति की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जीपीआर सर्वे या किसी भी बड़ी कार्रवाई पर निर्णय शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
पोर्टल पर अपडेट हुईं 1216 संपत्तियां
वर्ष 2025 में हुई गहन जांच के बाद, प्रशासन ने ऐसी 1,216 संपत्तियों को चिन्हित किया जिन्हें सरकारी रिकॉर्ड में वापस दर्ज किया गया है। इन सभी संपत्तियों का विवरण 'उम्मीद' पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट कर दिया गया है। वर्तमान में इन संपत्तियों का प्रबंधन मुतवल्लियों (ट्रस्टियों) द्वारा किया जा रहा है, जो अलीगढ़ शहर, कोल तहसील और आसपास के कस्बों में फैली हुई हैं।
कैसे काम करता है ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सर्वे
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का संचरण किया जाता है। ये तरंगें मिट्टी, चट्टान, कंक्रीट या बर्फ के अंदर गहराई तक जाती हैं। जब ये तरंगें जमीन के अंदर किसी अलग घनत्व वाली वस्तु (जैसे पाइप, केबल, दबे हुए निर्माण, पत्थर या मिट्टी की अलग परत) से टकराती हैं, तो वे वापस परावर्तित होकर सतह पर आ जाती हैं। इसे इको या प्रतिध्वनि की तरह समझा जा सकता है।
सतह पर लगा रिसीवर इन वापस आने वाली तरंगों को पकड़ता है और दो मुख्य चीजें रिकॉर्ड करता है। पहली, तरंग को नीचे जाने और वापस आने में कितना समय लगा। इससे वस्तु की गहराई का पता चलता है। दूसरा तरंग कितनी मजबूती से वापस आई। इससे वस्तु के प्रकार का अंदाजा मिलता है। इससे बिना खोदाई के जमीन को नुकसान पहुंचाए बिना सर्वे किया जाता है। यह पुरानी नींव, दबे हुए पाइप और जमीन के अंदर के विवादित हिस्सों का सटीक नक्शा बना सकता है।