गंगा और यमुना के दोआबे पर बसे अलीगढ़ में बाढ़ का खतरा है। गंगा नदी अतरौली क्षेत्र में खतरे के निशान से सिर्फ आधार मीटर नीचे बह रही है। इधर, यमुना नदी खतरे के निशान से 4.5 मीटर नीचे है। बाढ़ प्रबंधन के नोडल अधिकारी ने डेरा डाल लिया है। टीमें तैनात कर दी गईं हैं। ग्रामीणों को सचेत किया गया है।
शनिवार तक अतरौली क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर 178.08 रहा, जबकि खतरे का निशान 178.765 मीटर पर है। यानी खतरे के निशान से मात्र 0.685 मीटर नीचे है। नरौरा खंड निचली गंगा नहर के अधिशासी अभियंता एवं जिले के बाढ़ प्रबंधन के नोडल अधिकारी भरत लाल ने बताया कि उनकी निगरानी में टीमें निगाह रख रही हैं।
उत्तराखंड की बारिश और बाढ़ पर खास निगाह रखी जा रही है। दरअसल, वहां बारिश व बाढ़ की स्थिति होने पर गंगा का जलस्तर बढ़ता है। तभी वहां से नरौरा बैराज की ओर पानी छोड़ा जाता है। नरौरा बैराज पर अधिक जल स्तर पर होने पर वहां से अलीगढ़ की ओर पानी छोड़ा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया पर निगाह रखी जा रही है। जिला प्रशासन को प्रतिदिन की रिपोर्ट से अवगत कराया जा रहा है।
इधर, यमुना की बात की जाए तो खैर क्षेत्र से यमुना नदी गुजर रही है। फिलहाल यमुना का जलस्तर 196.10 मीटर (शनिवार तक) था। यहां खतरे का निशान 200.600 मीटर पर है। वर्तमान में हर दिन करीब अलीगढ़ से इस नदी में आगरा की ओर 11364 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
2018 के बाद जुलाई में इस वर्ष सबसे अधिक बारिश
जुलाई 2018 के बाद अब 2021 में सबसे अधिक बारिश हुई है। वर्ष 2019 और 2020 में जुलाई माह बारिश के लिहाज से जिले के लिए अच्छा नहीं रहा था। बीती जुलाई में 1159 एमएम बारिश हुई है। इससे पूर्व 2018 में 1647 एमएम बारिश हुई थी। वहीं, अगस्त माह के पहले सप्ताह की बात की जाए तो अब तक 140 एमएम के करीब बारिश रिकॉर्ड की गई है। कोल तहसील में सबसे अधिक बारिश हुई है। वहीं, गभाना में सबसे कम बारिश हुई है।
वर्ष जुलाई माह में हुई बारिश
2021 1159 एमएम
2020 382 एमएम
2019 431 एमएम
2018 1647 एमएम
2017 277 एमएम
2016 1450 एमएम