बसपा शासनकाल में गरीबों के लिए शुरू की गई महामाया गरीब आर्थिक योजना में हुए फर्जीवाड़े में शासन ने 13 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट मांगी है। विभागीय अफसरों को तीन दिन में यह रिपोर्ट शासन को भेजनी है।
तत्कालीन बसपा सरकार ने प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद के लिए महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना शुरू की थी। इस योजना में चयनित पात्रों को 400 रुपये प्रदान किए जाते थे। इसके बाद सपा सरकार में इस योजना का नाम बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई योजना कर दिया।
बसपा सरकार के दौरान जिले में इस योजना में गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं। इस पर जिला स्तर पर तीन सदस्यीय समिति ने जांच की तो जानकारी सामने आई कि योजना में 24,098 फार्म मिले थे, इनमें से 19,294 आवेदन पत्रों पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर ही नहीं थे। अब शासन स्तर से समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक से जांच आख्या मांगी गई है। समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि शासन ने 13 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने बताया कि जिला स्तरीय अफसरों को पत्र लिखा है। तीन दिन में यह रिपोर्ट भेजी जानी है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी व अपर जिला विकास अधिकारी समाज कल्याण विभाग के खिलाफ शासकीय क्षति एवं अनियमित भुगतान की जांच पूरी होनी है।