डेढ़ दशक के सफर में तालों की नगरी लगातार न सिर्फ आगे बढ़ रही है, यहां के ताले अब इंटरनेट से ऑपरेट होने लगे हैं। इंसानी हाथों के इशारों पर आधुनिक रोबोटिक तालों को गढ़ने लगे हैं। चार मंजिल ऊंची इमारते 12 मंजिल तक सीढ़ियां चुकी हैं। शहर में रमाडा से लेकर लेमन ट्री, फारच्युन तक के होटल देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को लजीज व्यंजन परोस रहे हैं।
हवाई उड़ान के लिए तैयार हुआ धनीपुर एयरपोर्ट
अलीगढ़ का धनीपुर मिनी एयरपोर्ट लखनऊ तक की हवाई उड़ान के लिए तैयार हो चुका है। शहर के चारों ओर फोरलेन हाइवे पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं। यह फोरलेन आने वाले समय में छह और आठ लाइन में परिवर्तित होंगे।
आधुनिक कैमरे चौराहों पर कर रहे निगरानी
शहर के चौराहों पर एडवांस्ड कैमरे सड़क पर ड्राइवर के हाथों की घड़ी का डायल तक देख सकते हैं। इन कैमरों के साथ ही वॉइस बाक्स लगा दिए गए हैं। इनके माध्यम से कोई भी मदद मांगी जा सकती है। शहर का दायरा चारों ओर लगभग पांच किलोमीटर तक व्यवस्थित ढंग में आगे बढ़ रहा है।
बढ़ रहीं सुविधाएं, विकसित हो रहा शहर
अपार्टमेंट और कालोनियों के रूप में गांव तब्दील हो रहे हैं। रामघाट रोड, मुरादाबाद हाइवे, आगरा रोड, अलीगढ़ पलवल रोड, अलीगढ़ दिल्ली हाइवे, मथुरा रोड, कानपुर हाइवे के सहारे नई-नई कालोनियां और अपार्टमेंट सहित उद्योग लग रहे हैं। शहर के आसपास के 19 गांव एक साल पहले ही नगर निगम ने अपनी सीमा में शामिल किया है। रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट और एक्सीलेरेटर की सुविधा हो गई है। बहुप्रतिक्षित राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय और डिफेंस कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, ई-बस सेवा जैसे प्रोजेक्ट न सिर्फ अलीगढ़ में रोजगार पैदा कर रहे हैं। बल्कि इन प्रोजेक्ट के सहारे अलीगढ़ का भी विकास हो चला है।
बैंकों का टर्नओवर पहुंचा 40 हजार करोड़ के आसपास
आज से 17 साल पहले जनपद की बैंकों का टर्नओवर छह हजार करोड़ के आसपास था। जो अब 40 हजार करोड़ सालान तक जा पहुंचा है। डिजिटल लेनदेन के मामले में भी अलीगढ़ काफी आगे बढ़ चुका है। सब्जी की ढकेल से लेकर रोजमर्रा की दैनिक वस्तुएं अब ग्राहक अपने स्मार्ट फोन के जरिए खरीद रहे हैं।