पूर्व विधायक डॉ.राम सिंह कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह के सबसे ज्यादा करीबी रहे। वे कल्याण सिंह के साथ एक ही बाइक पर बैठकर चुनाव प्रचार करने के साथ पार्टी के लिए चंदा भी एकत्रित करते थे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उनसे मंत्री बनने के लिए कहा गया, लेकिन पूर्व विधायक ने भाजपा के सिपाही के तौर पर कार्य करना पसंद किया।
अटल बिहारी को दी थी 91,455 रुपये की थैली
सन् 1981 में भाजपा की जनसभा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण के साथ मिलकर पूर्व विधायक डॉ. राम सिंह ने घर-घर जाकर चंदा एकत्रित किया था। इसके बाद हुई जनसभा में आए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 91,455 रुपये की थैली भेंट की थी।
छर्रा में कराए थे विकास कार्य
पूर्व विधायक ने नगर पंचायत छर्रा में कई विकास कार्य कराए थे। उन्होंने यहां पर श्री राममूर्ति गुप्ता राजकीय महाविद्यालय, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पानी की टंकी का निर्माण कराने के साथ ही कई सड़कों का निर्माण कराया था।
दादों में गांव कसेर के भूपेंद्र यादव ने पूर्व विधायक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर जेके कुमार, केशव देव, राहुल व धीरज कुमार मौजूद रहे।
पूर्व विधायक को दी अंतिम विदाई
पूर्व विधायक के अंतिम संस्कार से पूर्व भाजपा के जिलाध्यक्ष चौधरी कृष्णपाल सिंह लाला ने पार्थिव शरीर पर पार्टी का झंडा रख अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में हाथरस सांसद अनूप प्रधान, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला, विधायक रवेंद्रपाल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह, क्षेत्रीय महामंत्री ब्रज प्रांत हेमंत राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह, भाजयुमो जिलाध्यक्ष धर्मवीर सिंह लोधी, ठाकुर राहुल सिंह ब्लॉक प्रमुख, योगेश यादव ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि, ज्ञानेंद्र राजपूत, छर्रा के चेयरमैन पति लालू महाजन, नायाब तहसीलदार मयंक गोयल, इंद्रपाल सिंह, ओमपाल सिंह मौजूद रहे।
डॉ. रामसिंह का राजनीतिक सफर
- 1972 में पैतृक गांव सुनपहर ऐदलपुर से ग्राम पंचायत सदस्य चुने गए
- 1973 से न्याय पंचायत बरौली से तीन बार सरपंच चुने गए
- 1982 में विकास खंड गंगीरी से दो बार ब्लॉक प्रमुख रहे।
- 1989 में पहली बार गंगीरी विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़े और 20 हजार वोट लेकर हार गए।
- 1991 में गंगीरी विधानसभा सीट पर भाजपा ने टिकट दिया और वह जीतकर पहली बार विधायक बने
- 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा
- 1996 में गंगीरी विधानसभा सीट से फिर विधायक बने
- 2000 में भाजपा के जिलाध्यक्ष बने
- 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में हार मिली
- 2007 के विधानसभा चुनाव में जीतकर तीसरी बार विधायक बने
- 2012 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा के कद्दावर नेता और तीन बार के विधायक रहे डॉ. सिंह के परिवार पर पिछले कुछ समय से दुखों के पहाड़ लगातार टूट रहे हैं। पिछले छह माह में यह तीसरी मौत है। डॉ. राम सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सुनपहर ऐदलपुर में मंगलवार की दोपहर किया गया। मुखाग्नि बेटे अनिल राजपूत ने दी।
डॉ. रामसिंह के चार बेटे थे, जिनमें से दो बेटों की मौत हो चुकी है। करीब 20 साल पूर्व सबसे छोटे बेटे श्रीभगवान निवासी छर्रा की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। डॉ. रामसिंह वर्तमान में श्रीभगवान की धर्मपत्नी लता राजपूत और दो नातियों के साथ छर्रा में रह रहे थे। छह माह पूर्व सबसे बड़े बेटे डॉ. विनोद निवासी स्वर्णजयंती नगर अलीगढ़ की घर में ही गिरकर मौत हो गई थी। इनके अलावा तीन माह पहले तीसरे नंबर के बेटे यशपाल निवासी छर्रा की पत्नी संतोष देवी का कैंसर की बीमारी के चलते निधन हो गया था। दूसरे नंबर के बेटे अनिल राजपूत छर्रा में अपने परिवार के साथ रहते हैं। डॉ. रामसिंह की पत्नी चंदो देवी का निधन करीब 40 साल पहले हो चुका है।
राम मंदिर आंदोलन की लहर में पहली बार विधानसभा पहुंचे डॉ. रामसिंह
नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था। कार सेवा का दौर और चारों ओर जयश्रीराम के नारों से वातावरण राममय था। इसी दौरान डॉ. रामसिंह राम मंदिर आंदोलन की बागडोर संभाले हुए थे। गंगीरी विधानसभा क्षेत्र के अलावा पूरे जिले में डॉ. रामसिंह हिंदूवादी नेता के रूप में छाए हुए थे। इसका लाभ 1991 के विधानसभा चुनाव में मिला और डॉ. रामसिंह विधायक बनकर पहली बार विधानसभा में पहुंचे।
राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा अशोक सिंघल और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के गढ़ रहे अलीगढ़ में कई नाम ऐसे रहे जिन्होंने जिले में हिंदूवादी नेता के रूप में स्थापित किया। इनमें डॉ. रामसिंह का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। इसका बड़ा कारण है कि जब जिले में कांग्रेस नेताओं की तूती बोलती थी उस समय में इन नेताओं ने भाजपा को विधानसभा तक पहुंचाया। चूंकि डॉ. राम सिंह ने पंचायत चुनाव से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और ब्लॉक प्रमुख भी रहे। जब राम मंदिर आंदोलन की लहर में 1991 में विधानसभा चुनाव हुए तो डॉ. रामसिंह विधानसभा तक पहुंच गए। इसके बाद तीन बार वह विधायक रहे और भाजपा ने इन्हें जिलाध्यक्ष भी बनाया।
आंदोलनों में डॉ. रामसिंह के साथी रहे तथा पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह हिंडोल और पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील पांडे बताते हैं कि डॉ. रामसिंह हमेशा पार्टी के प्रति समर्पित रहे। तमाम उतार-चढ़ाव का सामना करते हुए भी उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। यही कारण रहा कि जनता में उनकी पहचान समर्पित नेता के रूप में बनी रही। भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला कहते हैं कि डॉ. रामसिंह का निधन पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। पुराने समर्पित नेताओं की मेहनत का ही परिणाम है कि आज केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं।