शहर की घनी आबादी वाले सादाबाद गेट पर स्थित रंग, हींग और केमिकल की फैक्टरी में रविवार देर रात को एकाएक भीषण आग लग गई। इससे वहां अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। मौके पर तीन दमकलें भी आ गईं। आग केमिकल से भरे ड्रमों और गैस सिलिंडरों में लग गई।
आग बुझाने के चक्कर में मुख्य अग्निशमन अधिकारी, कोतवाली निरीक्षक सदर सहित आधा दर्जन से ज्यादा लोग झुलस गए। इनको अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। कुछ कर्मचारी देर रात आग पर काबू पाने में लगे थे, लेकिन फैक्टरी के अंदर रखे केमिकल के ड्रमों और गैस सिलिंडर में धमाके हो रहे थे और इसकी वजह अधिकारी आग पर काबू पाने की बात कहने को लेकर स्पष्ट नहीं थे।
स्थानीय सादाबाद गेट बूटीनाथ मंदिर के निकट रामबाबूलाल और संजीव कुमार निवासी गिजरौली की रंग, हींग और केमिकल की फैक्टरी है। इस फैक्टरी का संचालन रामबाबू लाल, संजीव कुमार एंड कंपनी के नाम से होता है। सोमवार की रात्रि आठ बजे के लगभग अचानक फैक्टरी में आग लग गई। इसे देखकर आसपास के लोग घबरा गए।
फैक्टरी से आग की ऊंची लपटों को निकलते देखा वहां भगदड़ मच गई। आग लगने के बाद अंदर से धमाके की आवाज भी आने लगी। इस फैक्टरी में केमिकल के ड्रम और गैस के सिलिंडर भी रखे थे। ऐसे में धमाकों की आवाज सुनकर लोगों में दहशत फैल गई। लोगों को यह डर सताने लगा कि कहीं आग आसपास के इलाके में नहीं फैल जाए।
सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग से तीन गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। कोतवाली पुलिस भी मौके पर आ गई। पुलिस ने लोगों को फैक्टरी के पास से हटाया। फायर कर्मी लगातार आग पर काबू पाने में लग गई। इस दौरान जब अग्निशमन की टीम आग बुझाने में जुटी थी तो वहां सिलिंडर अथवा केमिकल का ड्रम फट गया। इसकी चपेट में आकर मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके सिंह, एएसई बीएस पाल, कांस्टेबल गौरव अत्री, कांस्टेबल ओमकुमार के अलावा चक्की बाजार निवासी अमित शर्मा, सभासद विनोद प्रेमी सहित कई लोग झुलस गए।
वहां मौजूद कोतवाली निरीक्षक प्रवेश राणा भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। इन सभी को आनन-फानन जिला अस्पताल लाया गया। वहां से एएसआई बीएस पाल, गौरव अत्री, ओमकुमार को गंभीर हालत में अलीगढ़ रेफर करदिया गया।
सूचना पाकर अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ वर्मा भी जिला अस्पताल पहुंच गए। बाद में वह फैक्टरी भी गए। देर रात फैक्टरी में आग बुझाने की बात कही जा रही थी, लेकिन जिस तरह से बार-बार आग की लपटें उठ रही थीं और धमाके हो रहे थे, उससे अधिकारी आशंकित थे कि कहीं अन्य फैक्टरी में आग नहीं लग जाए।