- सौ लोगों को आरोपी बनाकर दाखिल की गई हैं दो मुख्य मुकदमों में चार्जशीट
- सभी को एसआईटी ने भेजे थे डाक के जरिये नोटिस, कोई न आया जवाब देने
- इसी बवाल में पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की गई थी जनहित याचिका
- हाईकोर्ट के निर्देश पर एनएचआरसी ने की जांच, हाईकोर्ट को सौंपी जांच रिपोर्ट
ये हैं दो मुकदमे
- पहला मुकदमा:-इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार ने क्राइम नंबर 703/19 धारा 147/148/149/153/188/189/332/336/307/504/506/7 सीएलए एक्ट व 3 सार्वजनिक संपत्ति निवारण अधिनियम में दर्ज कराया, जिसमें 52 नामजद और 1300 अज्ञात आरोपी बनाए गए थे।
- दूसरा मुकदमा:-सिविल लाइंस के सब इंस्पेक्टर निजामुद्दीन ने क्राइम नंबर 704/19 धारा 353/332/7 सीएलए एक्ट में दर्ज कराया, जिसमें 26 नामजद और 1300 अज्ञात आरोनी बनाए गए थे। इस मुकदमे में पहले दिन सर्विस पिस्टल लूट की कोशिश व पांच कारतूस लूटने का आरोप भी था। मगर बाद में कारतूस मिलने पर लूट की धारा हटा दी गई थी।
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़। सीएए-एनआरसी के विरोध के दौर में 15 दिसंबर की देर रात एएमयू के बाब-ए-सैयद गेट पर हुए हिंसक प्रदर्शन के मुकदमों में पुलिस की एसआईटी ने विवेचना पूरी कर चार्जशीट दायर कर दी है। यह चार्जशीट अभी सिर्फ उन्हीं दो मुकदमों में दायर की गई है, जो एएमयू बवाल के दो मुख्य मुकदमे हैं। इनमें एसआईटी जांच में सौ के करीब नाम प्रकाश में लाए गए थे, जिन्हें मुकदमों में आरोपी बनाकर चार्जशीट में शामिल किया गया है। हालांकि इन सभी लोगों को जांच टीम के स्तर से नोटिस भेजकर अपना जवाब दाखिल करने का मौका दिया गया था। मगर, किसी ने पलटकर जवाब देना उचित नहीं समझा और एसआईटी ने चार्जशीट दायर कर दी। हालांकि, अभी कुछ मुकदमे 16 दिसंबर और उसके बाद के अलग-अलग क्षेत्रों के हैं, जिनकी विवेचना सिविल लाइंस सहित संबंधित थानों में प्रचलित है।
बवाल की रात हुए थे 26 गिरफ्तार, दबाव में जमानत पर छोड़े
सीएए-एनआरसी को लेकर 9 दिसंबर से ही एएमयू में विरोध शुरू हो गया था। इसी क्रम में 12 दिसंबर को यहां गोरखपुर के डॉक्टर कफील ने भाषण दिया। 13 दिसंबर शुक्रवार को कई हजार छात्र बाब-ए-सैयद पर जुमे की नमाज के बाद एकत्रित हुए थे। उन्हें किसी तरह शांत किया गया था। इसके बाद 15 दिसंबर की रात दिल्ली में जामिया के छात्र की मौत की अफवाह पर कैंपस फिर गरम हो गया और कुछ छात्र नेताओं व बाहरियों की भीड़ उग्र हो गई। इन्होंने कैंपस से बाहर निकलने की कोशिश की और जब पुलिस स्तर से रोकने का प्रयास हुआ तो हिंसक टकराव हुआ। इस मामले में पुलिस मुकदमे हुए। रात में ही 26 गिरफ्तारियां हुईं, जिन्हें अगले दिन शहर भर में बवाल फैलने और रिहा किए जाने को लेकर प्रदर्शन होने के दबाव में जमानत पर रिहा किया गया। छात्रों की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर एनएचआरसी ने जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने पुलिस पर टिप्पणी की।
आरएएफ की तहरीर भी इसी मुकदमे में शामिल हुई
इधर, डीजीपी ने प्रदेश भर में उस दौर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के मुकदमों की जांच जोन स्तर पर एडीजी की निगरानी में एसआईटी गठित कर उन्हें सौंप दी। इसी क्रम में यहां के दो मुकदमों की विवेचना एसआईटी ने की। इस बवाल के मुख्य मुकदमे में ही आरएएफ द्वारा दी गई तहरीर को भी शामिल कर लिया गया था। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपी अब तक जेल भेजे हैं, जबकि 26 पहले दिन गिरफ्तारी हुईं, जिन्हें जमानत पर छोड़ा गया। इसके अलावा कुछ अन्य नाम सामने आए। जिन्हें डाक के जरिये नोटिस भेजे गए। मगर कोई जवाब देने नहीं आया। इस तरह करीब 100 आरोपियों पर दोनों मुकदमों में चार्जशीट दायर की गई है।
-15 दिसंबर की रात एएमयू बवाल के मुख्य दो मुकदमों की विवेचना एसआईटी स्तर से की जा रही थी, जिनकी विवेचना पूरी होने के बाद अब उनमें चार्जशीट दायर कर दी गई है। अब अदालत स्तर से आरोपियों को तलब कर आगे कार्यवाही पूरी की जाएगी। इस घटना के बाद शहर भर में हुए घटनाक्रमों व एएमयू से संबंधित अन्य मुकदमों में अभी विवेचना जारी है। -मुनिराज जी एसएसपी