फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पर्यावरण दिवस : बचाने को धरा और धरा का श्रंगार, लॉकडाउन कर दें वर्ष में एक बार

विज्ञापन
फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस, एएमयू - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
इंसानी दखल से लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे पर्यावरण को लॉकडाउन में नई संजीवनी दी है। पांच जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अब इस तरह का विचार आकार ले रहा है कि क्यों न प्रत्येक वर्ष 21 दिनों के लिए लॉक डाउन ही घोषित कर दिया जाए, जिससे लगातार इंसानी दखल से नुकसान उठा रहे पर्यावरण को अपनी हालत सुधारने का एक मौका मिल जाए।
विज्ञापन

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के मुताबिक लॉकडाउन में वन्यजीवों के लिए माहौल बेहतर हुआ है और उनकी गतिविधियां भी बढ़ी हैं। एएमयू भूगोल विभाग के प्रोफेसर अतीक के मुताबिक प्रदूषण का स्तर औसत से भी कम हो गया है। एएमयू वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफउल्लाह कहते हैं इसमें कोई दो राय नहीं के पिछले दो-तीन महीनों में पक्षियों की चहचहाहट बढ़ गई है। पूरा परिस्थिति का चक्र बेहतर हुआ है। एएमयू कैंपस की बात करें तो वह पक्षी जो दिखाई नहीं देते थे अब दिखने लगे हैं। ऐसे में अगर वर्ष में एक बार 21 दिन के लॉकडाउन की बात हो रही है तो इस विचार में कोई बुराई नहीं है। भूगोल विभाग के प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि वातावरण में कार्बन का स्तर कम हुआ है।
सांस लेने वाली वायु का स्तर और उस में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी है। यह अच्छा संकेत है। दुनिया भर के पर्यावरणविद् वर्ष में एक बार लॉकडाउन की बात अगर कर रहे हैं तो मनुष्य को बचाने के लिए, पृथ्वी को बचाने के लिए यह एक अच्छा कदम होगा। जब से इंसानों ने इनकी हद में डेरा डाला है, देख नदी की लहर लहर पे दर्द का उभरा छाला है। -जॉनी फास्टर
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें